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अमेरिका-इज़रायल संबंध और संघर्ष विराम की अहमियत


अमेरिका और इज़रायल के रिश्ते हमेशा से ही मज़बूत और रणनीतिक रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात में इन संबंधों पर और अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। हाल ही में अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता इस क्षेत्र में जारी संकट को कम करना और बंधकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना है।

जानकारी के अनुसार, कुल 48 बंधक अब भी संघर्ष के बीच फंसे हुए हैं, जिनमें से कुछ जीवित हैं और कुछ की मृत्यु हो चुकी है। रुबियो ने कहा कि अमेरिका का सबसे पहला लक्ष्य इन सभी बंधकों को उनके परिवारों तक सुरक्षित पहुँचाना है।

इस पूरे घटनाक्रम में यह साफ दिखाई देता है कि अमेरिका केवल इज़रायल का समर्थन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और शांति स्थापित करने में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। अमेरिकी प्रशासन की नीति का मुख्य केंद्र इस समय संघर्ष विराम और मानवीय संकट का समाधान है।

रुबियो ने यह भी संकेत दिया कि वर्तमान हालात बेहद नाज़ुक हैं और ऐसे में हर कदम सोच-समझकर उठाया जाना चाहिए। कूटनीति ही इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान बन सकती है, ताकि निर्दोष नागरिकों की जानें बचाई जा सकें और तनावपूर्ण माहौल को शांति में बदला जा सके।

अमेरिकी विदेश सचिव का यह रुख न केवल बंधकों की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्प को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अमेरिका क्षेत्रीय शांति की दिशा में अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।


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