
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में “ऑपरेशन सिंदूर” से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसने देश की सुरक्षा और संप्रभुता पर फिर से गहरी चर्चा छेड़ दी है। यह बयान उन्होंने हैदराबाद मुक्ति दिवस की 78वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह के दौरान दिया।
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की संप्रभुता और अखंडता से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद के एक बड़े कमांडर और उसके परिवार का सफाया कर दिया गया, जो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए थे।
ऑपरेशन सिंदूर का महत्व
“ऑपरेशन सिंदूर” सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई भर नहीं थी, बल्कि यह भारत की सुरक्षा एजेंसियों और सेना की रणनीतिक क्षमता का प्रमाण भी है। इस ऑपरेशन ने यह संदेश दिया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार है।
संप्रभुता पर रक्षा मंत्री का जोर
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत किसी भी आतंकी संगठन या उनके समर्थकों को बख्शने वाला नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की सेनाएँ हर परिस्थिति में देश की रक्षा करने में सक्षम हैं और आतंकवाद को जड़ से मिटाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
हैदराबाद मुक्ति दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ
रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय पर आया जब पूरा देश हैदराबाद मुक्ति दिवस की 78वीं वर्षगांठ मना रहा था। 1948 में इस दिन भारत ने हैदराबाद रियासत को स्वतंत्र कराया था और इसे भारतीय गणराज्य का हिस्सा बनाया था। राजनाथ सिंह ने इस ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए कहा कि जैसे उस समय भारत ने अपनी एकता के लिए निर्णायक कदम उठाए थे, वैसे ही आज भी राष्ट्र की संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं होगा।
निष्कर्ष
राजनाथ सिंह का यह बयान न केवल “ऑपरेशन सिंदूर” की सफलता को रेखांकित करता है, बल्कि भारत की मजबूत और निर्णायक सुरक्षा नीति को भी दर्शाता है। यह संदेश आतंकवादियों और उनके संरक्षकों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि भारत की संप्रभुता सर्वोपरि है और इसे चुनौती देने वालों को कड़ी सज़ा भुगतनी होगी।