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यूक्रेन का भविष्य: सुरक्षा गारंटी और युद्ध की भारी कीमत


रूस-यूक्रेन युद्ध अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और इस बीच यूक्रेन केवल मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर भी संघर्ष कर रहा है। राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने हाल ही में अपने देश की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए कुछ प्रमुख रणनीतिक बिंदुओं को साझा किया। उनका मानना है कि भविष्य की स्थिरता के लिए केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि ठोस वित्तीय और कूटनीतिक गारंटी भी उतनी ही ज़रूरी हैं।

सुरक्षा गारंटी के चार स्तंभ

ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन की सुरक्षा व्यवस्था को चार बड़े हिस्सों में विभाजित किया है:

  1. सैन्य सहयोग – उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वायु, समुद्री और ज़मीनी मोर्चे पर मज़बूत सेना के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों का योगदान बेहद अहम है। पश्चिमी देश अब इन आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से समझ रहे हैं और आवश्यक हथियार व तकनीक उपलब्ध कराने की तैयारी में हैं।
  2. यूक्रेनी सेना की ताक़त – ज़ेलेंस्की ने साफ किया कि केवल सहयोग ही पर्याप्त नहीं है। एक बड़ी और सक्षम सेना को बनाए रखने के लिए लगातार भारी वित्तीय निवेश की आवश्यकता है। इसके लिए वे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से सीधे आर्थिक मदद की अपील कर रहे हैं।
  3. अनुच्छेद 5 जैसी गारंटी – नाटो का अनुच्छेद 5 सामूहिक रक्षा की धारणा पर आधारित है। चूंकि यूक्रेन नाटो का हिस्सा नहीं है, इसलिए वह अमेरिका सहित कई देशों के साथ द्विपक्षीय सुरक्षा समझौतों पर बातचीत कर रहा है, ताकि किसी नए हमले की स्थिति में उसे तुरंत और ठोस समर्थन मिल सके।
  4. प्रतिबंध और पुनर्निर्माण – यूक्रेन का मानना है कि यदि रूस फिर से आक्रामकता दिखाता है, तो उस पर कठोर आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाए जाएँ। साथ ही, रूस की जब्त की गई संपत्तियों का उपयोग युद्धग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में किया जाना चाहिए।

युद्ध की वित्तीय चुनौती

यूक्रेन के सामने सबसे बड़ी कठिनाइयों में से एक है युद्ध का भारी खर्च। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के अनुसार, हर साल लगभग 120 बिलियन डॉलर इस संघर्ष पर खर्च हो रहे हैं। इसमें से आधा खर्च यानी 60 बिलियन डॉलर यूक्रेन अपनी राष्ट्रीय आय से पूरा कर रहा है। लेकिन बाकी रकम जुटाने के लिए उसे सहयोगी देशों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

इस स्थिति से निपटने के लिए यूक्रेन ने दो योजनाएँ बनाई हैं:

निष्कर्ष

ज़ेलेंस्की की घोषणा यह स्पष्ट करती है कि यूक्रेन केवल हथियारों के बल पर नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग और आर्थिक प्रबंधन के जरिए भी अपने भविष्य को सुरक्षित करना चाहता है। रूस के ख़िलाफ़ यह संघर्ष अब सिर्फ़ मोर्चे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रतिबंधों, कूटनीति और वित्तीय रणनीतियों का भी खेल बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय समर्थन ही वह कुंजी है, जो यूक्रेन की सुरक्षा और स्थिरता के द्वार खोल सकती है।


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