
हर साल 18 सितंबर को ईरान में राष्ट्रीय कविता और फ़ारसी साहित्य दिवस मनाया जाता है। यह अवसर केवल भाषा की सुंदरता को याद करने का नहीं, बल्कि उन अमर कवियों को सम्मान देने का है जिन्होंने फ़ारसी संस्कृति और सभ्यता को अमरत्व प्रदान किया। इस गौरवशाली परंपरा में सबसे बड़ा नाम है — हकीम अबुल-क़ासिम फ़रदौसी तूसि।
🏛️ शाहनामा: शब्दों में इतिहास और संस्कृति
फ़रदौसी की महान कृति शाहनामा सिर्फ़ एक कविता-संग्रह नहीं, बल्कि एक सभ्यता का दर्पण है। लगभग 50 हज़ार शेरों से बनी यह महागाथा ईरानी इतिहास, पौराणिक कथाओं और नैतिक मूल्यों को जीवंत कर देती है। इसमें शक्ति, न्याय, वीरता और मानवता के आदर्श इस तरह पिरोए गए हैं कि यह आज भी नई पीढ़ी को प्रेरणा देती है।
🗣️ आधुनिक दृष्टि में फ़रदौसी
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने फ़रदौसी को “आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता का स्रोत” बताया है। उनके विचार में शाहनामा केवल साहित्य नहीं, बल्कि समाज को नैतिक दिशा दिखाने वाला प्रकाशस्तंभ है। हाल ही में @khamenei_poems द्वारा साझा किए गए एक विशेष वीडियो में संगीत और दृश्य कला के सहारे फ़रदौसी की विरासत को नए अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया, जो युवाओं को उनकी धरोहर से जोड़ने की अनूठी पहल है।
🎶 परंपरा और आधुनिकता का संगम
इस प्रस्तुति में शास्त्रीय विचारों को आधुनिक धुनों और चित्रों से जोड़ा गया है। यह प्रयोग साबित करता है कि प्राचीन साहित्य को नई तकनीकों और कलात्मक माध्यमों के जरिए पुनर्जीवित किया जा सकता है। इससे युवा वर्ग न केवल अपने अतीत से परिचित होता है, बल्कि उसे गर्व और प्रेरणा भी मिलती है।
🌍 विश्व साहित्य में फ़रदौसी की गूँज
फ़रदौसी की रचनाएँ ईरान की सीमाओं से परे विश्व साहित्य के खज़ाने में शामिल हो चुकी हैं। शाहनामा का अनुवाद कई भाषाओं में हो चुका है और यह आज भी साहित्यिक व सांस्कृतिक शोध का अमूल्य आधार है। उनकी कविताओं में निहित सार्वभौमिक मूल्य मानवता के लिए किसी धरोहर से कम नहीं।
✨ निष्कर्ष
फ़रदौसी का साहित्य हमें यह याद दिलाता है कि कविता केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि मानव आत्मा का मार्गदर्शन भी है। राष्ट्रीय कविता और फ़ारसी साहित्य दिवस पर हमें उनकी “दिव्य बुद्धिमत्ता” से प्रेरणा लेनी चाहिए और उसे अपने जीवन की दिशा में शामिल करना चाहिए।