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🗳️ राहुल गांधी का गंभीर आरोप: “वोट चोरी फ़ैक्ट्री” का खुलासा


भारतीय राजनीति में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। लेकिन इस बार कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीधे तौर पर “वोट चोरी” का मुद्दा उठाकर सियासी माहौल को और गरमा दिया है।

राहुल गांधी का ट्वीट

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म “एक्स” (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा:

“सुबह 4 बजे उठो, 36 सेकंड में 2 वोटर मिटाओ, फिर सो जाओ – ऐसे भी हुई वोट चोरी!
चुनाव का चौकीदार जागता रहा, चोरी देखता रहा, चोरों को बचाता रहा।”

साथ ही उन्होंने हैशटैग #VoteChoriFactory का इस्तेमाल किया।

वीडियो में क्या है?

राहुल गांधी द्वारा साझा किए गए वीडियो में यह दिखाया गया कि किस तरह कुछ ही सेकंड में मतदाता सूची से नामों को हटाया जा सकता है। वीडियो में दावा किया गया है कि आधी रात या सुबह 4 बजे तक “सिस्टम” का इस्तेमाल करके वोटरों के नाम गायब किए जा रहे हैं। यह न केवल तकनीकी छेड़छाड़ का मामला हो सकता है बल्कि चुनावी पारदर्शिता पर सीधा हमला भी है।

राजनीतिक संदर्भ

भारत में हाल के वर्षों में चुनावी प्रक्रिया पर कई विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं—चाहे वह EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की पारदर्शिता का मुद्दा हो या मतदाता सूची में गड़बड़ी का। राहुल गांधी के इस बयान ने एक बार फिर चुनाव आयोग की भूमिका और निष्पक्षता पर बहस छेड़ दी है।

कांग्रेस पार्टी लंबे समय से यह आरोप लगाती रही है कि सत्ता पक्ष चुनावी प्रक्रिया को अपने हित में मोड़ने का प्रयास करता है। राहुल गांधी का यह बयान विपक्ष की उसी चिंता को और मजबूत करता है।

चुनाव आयोग पर प्रश्नचिह्न

राहुल गांधी ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि “चुनाव का चौकीदार” (संकेत रूप से चुनाव आयोग और सरकार) जागते हुए भी चोरी को देखता रहा और चोरों की रक्षा करता रहा। यह टिप्पणी चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न उठाती है।

जनता की प्रतिक्रिया

इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। कुछ लोग राहुल गांधी के आरोपों को गंभीर मान रहे हैं और चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता की माँग कर रहे हैं, तो वहीं कुछ इसे राजनीतिक प्रचार और माहौल बनाने की रणनीति कह रहे हैं।

निष्कर्ष

लोकतंत्र की असली ताक़त मतदान और जनमत में निहित होती है। यदि वोटर सूची में गड़बड़ी या “वोट चोरी” जैसी घटनाएँ होती हैं, तो यह न केवल चुनावी प्रक्रिया बल्कि पूरे लोकतंत्र की विश्वसनीयता को कमज़ोर करती हैं।

राहुल गांधी का यह ट्वीट सिर्फ़ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास की बुनियाद पर उठता गंभीर सवाल है। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।


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