
प्रस्तावना
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए भीषण दंगों ने न केवल राजधानी बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इन दंगों में कई लोगों की जान गई और करोड़ों की संपत्ति नष्ट हुई। अब इस मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने छह लोगों को दोषी करार दिया है, जिससे पीड़ितों को न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मिला है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला उस समय दर्ज हुआ जब 25 फरवरी 2020 को रात करीब 11 बजे, 100 से 150 लोगों की भीड़ ने सदतपुर इलाके में एक दुकान पर हमला किया। दंगाइयों ने दुकान का शटर तोड़ा, सामान लूटा और फिर दुकान में आग लगा दी। पीड़ित दुकानदार मोहम्मद वकील ने पुलिस स्टेशन खजूरी खास में एफआईआर दर्ज कराई थी।
अदालत की कार्यवाही और फैसला
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) परवीन सिंह ने गवाहों और सबूतों के आधार पर छह आरोपियों—गोरख नाथ, भीम सैनी, हरिओम गुप्ता, कपिल पांडे, रोहित गौतम और बसंत कुमार—को दोषी ठहराया। अदालत ने पुलिसकर्मी हेड कांस्टेबल संदीप की गवाही को विश्वसनीय माना, जिन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि आरोपी उस हिंसक भीड़ का हिस्सा थे जो हथियारों और पत्थरों के साथ मौके पर मौजूद थी।
न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे यह साबित किया है कि आरोपियों ने सामूहिक रूप से संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और आगजनी करने का अपराध किया।
कानूनी धाराएँ और दंडनीय अपराध
अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है, जिनमें शामिल हैं:
- धारा 188 (सरकारी आदेश की अवहेलना)
- धारा 147 और 148 (दंगा और घातक हथियारों से दंगा)
- धारा 149 (गैरकानूनी जमावड़े का हिस्सा होना)
- धारा 450 (गंभीर अपराध के लिए घर में घुसपैठ)
- धारा 435 (आगजनी द्वारा संपत्ति नष्ट करना)
आर्थिक नुकसान और पीड़ा
पीड़ित दुकानदार मोहम्मद वकील ने अदालत को बताया कि इस घटना में उनकी लगभग ₹1.5 लाख की संपत्ति नष्ट हो गई। अदालत ने इसे गंभीर आपराधिक शरारत (mischief) की श्रेणी में माना।
निष्कर्ष
इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हिंसक भीड़ का हिस्सा बनना भी उतना ही बड़ा अपराध है जितना प्रत्यक्ष रूप से अपराध करना। दंगों के दौरान हुई लूटपाट और आगजनी को देखते हुए यह फैसला उन सभी के लिए चेतावनी है जो सामूहिक हिंसा को अंजाम देने की कोशिश करते हैं। न्यायालय का यह कदम न केवल पीड़ितों को राहत देता है बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि कानून के सामने कोई भी दंगाई बच नहीं सकता।