HIT AND HOT NEWS

✍️ नियुक्तियों में पक्षपात का आरोप: अखिलेश यादव का बड़ा हमला


प्रस्तावना

उत्तर प्रदेश की राजनीति में नियुक्तियों और पदों के बंटवारे को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा है कि नियुक्तियों में 90% PDA (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) समाज की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है।

अखिलेश यादव का आरोप

अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने विभिन्न नियुक्तियों के आंकड़े प्रस्तुत किए। पोस्ट में दिखाए गए ग्राफ़ के अनुसार, STF और पुलिस विभाग सहित कई अहम पदों पर नियुक्तियों में एक विशेष जाति को अधिक प्रतिनिधित्व मिला है, जबकि PDA समाज को बेहद सीमित अवसर दिए गए हैं।

उन्होंने अपने संदेश में कहा:
“अन्याय की यह ‘शेर की दहाड़’ नियुक्तियों में साफ़ दिखाई देती है। भाजपा सरकार जाती है तो अवसर की समानता आएगी।”

प्रस्तुत आंकड़े

अखिलेश यादव द्वारा साझा किए गए आँकड़े चार अलग-अलग भर्ती और पदों की ओर संकेत करते हैं:

  1. शांति कृषि विश्वविद्यालय भर्ती (15 में 11 पद एक ही जाति को मिले)।
  2. इलाहाबाद बैंक भर्ती (27 में 15 पद एक ही जाति को मिले)।
  3. UP STF भर्ती (22 में 11 पद एक ही जाति को मिले)।
  4. गोरखपुर पुलिस भर्ती (19 में 8 पद एक ही जाति को मिले)।

इन आंकड़ों से उन्होंने यह तर्क दिया कि भाजपा सरकार नियुक्तियों में अवसर की समानता देने में पूरी तरह विफल रही है।

राजनीतिक सन्देश

सपा अध्यक्ष का यह बयान केवल नियुक्तियों पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि यह सामाजिक न्याय और बराबरी की राजनीति को भी मजबूती देता है। उनका कहना है कि भाजपा राज में केवल कुछ वर्ग विशेष को तरजीह दी जा रही है, जबकि अधिकांश आबादी हाशिए पर धकेली जा रही है।

जनता की प्रतिक्रिया

इस पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आईं। कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए लिखा कि जातिवाद अपने चरम पर है और इससे समाज में असमानता और गहरी हो रही है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक न्याय और अवसर की समानता हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। अखिलेश यादव का यह हमला चुनावी माहौल में जातिगत समीकरणों को और तीखा बना सकता है। सवाल यह है कि क्या वास्तव में नियुक्तियों में पक्षपात हो रहा है, या यह केवल राजनीतिक बयानबाज़ी है? इसका जवाब आने वाले समय और विस्तृत जाँच से ही मिलेगा।


Exit mobile version