
प्रस्तावना
आज के डिजिटल युग में सेमीकंडक्टर (Semiconductor) तकनीक हर क्षेत्र की रीढ़ बन चुकी है। चाहे स्मार्टफोन हों, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण या कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मशीनें—सभी का संचालन सेमीकंडक्टर चिप्स के बिना असंभव है। भारत ने इस आवश्यकता को समझते हुए एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर नीति (National Semiconductor Policy) की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य है देश को सेमीकंडक्टर उत्पादन और डिजाइन का वैश्विक केंद्र बनाना।
नीति की पृष्ठभूमि
भारत अब तक सेमीकंडक्टर चिप्स के लिए ताइवान, दक्षिण कोरिया, चीन और अमेरिका जैसे देशों पर निर्भर रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान (जैसे COVID-19 महामारी और भू-राजनीतिक तनाव) ने भारत को आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता का एहसास कराया। इसी दृष्टि से दिसंबर 2021 में भारत सरकार ने लगभग 76,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना की घोषणा की।
नीति के मुख्य बिंदु
- विनिर्माण इकाइयों की स्थापना
- देश में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Fab) प्लांट लगाने के लिए सरकार निवेशकों को बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
- 28 नैनोमीटर तक की उन्नत चिप निर्माण इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
- डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना
- भारत में स्टार्टअप और MSMEs को चिप डिजाइन के लिए प्रोत्साहन।
- स्वदेशी डिजाइन को बढ़ावा देकर भारत को “डिजाइन हब” बनाने का लक्ष्य।
- अनुसंधान और कौशल विकास
- आईआईटी, आईआईएससी और अन्य तकनीकी संस्थानों को शोध एवं विकास में जोड़ा गया है।
- युवाओं को VLSI (Very Large-Scale Integration) और चिप डिजाइन में प्रशिक्षित करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
- वैश्विक सहयोग
- अमेरिका, जापान और यूरोप के साथ साझेदारी कर भारत अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर रहा है।
- भारत को “विश्वसनीय तकनीकी भागीदार” के रूप में स्थापित करने की कोशिश।
नीति से होने वाले लाभ
- आत्मनिर्भर भारत मिशन को बल: विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी।
- रोजगार के अवसर: लाखों इंजीनियर, तकनीशियन और श्रमिकों के लिए रोजगार सृजित होंगे।
- नवाचार में वृद्धि: स्टार्टअप और रिसर्च संस्थानों को नया मंच मिलेगा।
- रणनीतिक मजबूती: रक्षा और संचार क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता से सुरक्षा मजबूत होगी।
चुनौतियाँ
- सेमीकंडक्टर फैब लगाने की लागत अत्यधिक (10–15 अरब डॉलर तक)।
- बिजली और पानी जैसी बुनियादी आवश्यकताओं की भारी खपत।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा में ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से मुकाबला।
निष्कर्ष
भारत की सेमीकंडक्टर नीति केवल एक औद्योगिक पहल नहीं है, बल्कि यह डिजिटल संप्रभुता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर निर्णायक कदम है। यदि सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थान मिलकर इस दिशा में कार्य करें तो भारत आने वाले वर्षों में न केवल विश्व का सबसे बड़ा उपभोक्ता बल्कि एक प्रमुख निर्माता भी बन सकता है।