
25 सितंबर को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो संदेश साझा किया। यह संदेश यूरोपीय कंजरवेटिव्स और रिफॉर्मिस्ट्स (ECR) समूह के कार्यक्रम “The Right that Wins” के लिए रिकॉर्ड किया गया था। उनका यह संबोधन केवल राजनीतिक वक्तव्य नहीं था, बल्कि यूरोप में दक्षिणपंथी विचारधारा की नई दिशा का ऐलान भी माना जा रहा है।
🎥 संदेश की अहम बातें
- वीडियो करीब 7 मिनट का था, जिसमें मेलोनी ने दृढ़ता और आत्मविश्वास के साथ अपने विचार रखे।
- उन्होंने यूरोपीय पहचान की सुरक्षा, सीमाओं की मजबूती और पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों को बचाए रखने पर ज़ोर दिया।
- मेलोनी ने साफ कहा कि आज का दक्षिणपंथ केवल विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन करने की योग्यता और दूरदृष्टि रखता है।
🌍 यूरोप में दक्षिणपंथ का बढ़ता प्रभाव
पिछले एक दशक में यूरोप की राजनीति में बड़ा बदलाव देखा गया है। कई देशों में दक्षिणपंथी दलों को अभूतपूर्व जनसमर्थन मिल रहा है।
- इटली में मेलोनी की पार्टी Fratelli d’Italia की जीत इसकी मिसाल है।
- फ्रांस, पोलैंड, हंगरी और स्वीडन जैसे देशों में भी यह विचारधारा मजबूत हुई है।
इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण सामने आते हैं:
- आव्रजन नीति पर नाराज़गी – बहुत से नागरिक मानते हैं कि उदारवादी दृष्टिकोण उनकी सांस्कृतिक पहचान को कमजोर कर रहा है।
- आर्थिक असमानता – वैश्वीकरण ने स्थानीय उद्योगों और श्रमिकों पर दबाव डाला है।
- EU नीतियों से असंतोष – कई देशों को लगता है कि यूरोपीय संघ उनके आंतरिक मामलों और संप्रभुता पर असर डाल रहा है।
🧭 मेलोनी का नया दृष्टिकोण
मेलोनी ने अपने संदेश में कहा कि आधुनिक दक्षिणपंथ केवल अतीत को थामने वाली ताकत नहीं है, बल्कि भविष्य को दिशा देने वाला आंदोलन है। उनके शब्दों में:
“हम वह दक्षिणपंथ हैं जो जीतता है, क्योंकि हम जनता की वास्तविक चुनौतियों को पहचानते हैं और उनके समाधान प्रस्तुत करते हैं।”
इस बयान से स्पष्ट होता है कि वह दक्षिणपंथ को एक व्यावहारिक और भरोसेमंद राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती हैं।
📌 निष्कर्ष
ECR का कार्यक्रम “The Right that Wins” और मेलोनी का संदेश यूरोपीय राजनीति के एक नए दौर की झलक देता है। यह दर्शाता है कि दक्षिणपंथी दल अब केवल विरोध की राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे खुद को शासन और स्थिरता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने लगे हैं। जहाँ एक तरफ इस बदलाव को लेकर आशंकाएँ हैं, वहीं दूसरी तरफ कई यूरोपीय नागरिक इसे उम्मीद और सुरक्षा के रूप में देख रहे हैं।