
22 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे दो महत्त्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं की नींव रखेंगे, जो पूर्वोत्तर भारत के ऊर्जा मानचित्र को नई ऊँचाई पर पहुँचाने वाला कदम साबित होंगी। यह यात्रा न सिर्फ़ क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से अहम है, बल्कि भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने वाली ऐतिहासिक पहल भी है।
🔍 परियोजनाओं की झलक
- स्थान: ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश
- परियोजनाएं: दो प्रमुख जलविद्युत संयंत्र
- अनुमानित लागत: लगभग ₹3,700 करोड़
- मुख्य उद्देश्य: अरुणाचल की नदियों से मिलने वाली जलविद्युत क्षमता का प्रभावी दोहन
इन परियोजनाओं से स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होगा, साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार, निवेश और बुनियादी ढांचे के नए अवसर खुलेंगे।
🌊 भारत के ऊर्जा भविष्य में अरुणाचल की भूमिका
अरुणाचल प्रदेश को लंबे समय से “देश का जलविद्युत केंद्र” कहा जाता है। यहाँ की नदियाँ—विशेषकर ब्रह्मपुत्र की सहायक धाराएँ—तेज़ प्रवाह और प्राकृतिक ढलान के कारण बिजली उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। नई परियोजनाओं से:
- राष्ट्रीय ग्रिड की मजबूती
- पूर्वोत्तर राज्यों की ऊर्जा ज़रूरतों की पूर्ति
- कार्बन उत्सर्जन में कमी
- ऊर्जा उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि
🛤️ पूर्वोत्तर की प्रगति की ओर कदम
पिछले वर्षों में केंद्र सरकार ने सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल संपर्क के क्षेत्र में पूर्वोत्तर को सशक्त बनाने के लिए बड़े निवेश किए हैं। अब ऊर्जा परियोजनाएँ इस विकास यात्रा का अगला पड़ाव हैं। इनके माध्यम से:
- युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोज़गार
- पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास
- सीमावर्ती इलाकों की रणनीतिक मज़बूती
🗣️ सामाजिक और राजनीतिक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा स्पष्ट करता है कि विकास केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। सीमांत क्षेत्रों और जनजातीय समाज को भी समान अवसर और संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। यह “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की वास्तविक अभिव्यक्ति है।
🔗 समापन
अरुणाचल प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला केवल एक ऊर्जा परियोजना की शुरुआत नहीं है—यह भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं, आत्मनिर्भर ऊर्जा नीति और पूर्वोत्तर की साझेदारी का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा पूरे क्षेत्र में नई उम्मीद और नई ऊर्जा का संचार करेगी।