
भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। यूनेस्को (UNESCO) की टेंटेटिव लिस्ट में हाल ही में सात नए प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थलों को शामिल किया गया है। इस उपलब्धि के साथ भारत की कुल प्रविष्टियाँ अब 62 से बढ़कर 69 हो गई हैं। यह न केवल हमारी सांस्कृतिक गहराई और जैव विविधता की स्वीकृति है, बल्कि संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय आजीविका के लिए भी नए अवसर खोलता है।
🌿 शामिल किए गए सात प्रमुख स्थल
- मेघालय के जीवित जड़ पुल (Living Root Bridges)
यहाँ प्रकृति और स्थानीय ज्ञान का अनूठा मेल दिखाई देता है। रबर के पेड़ों की जड़ों को वर्षों तक दिशा देकर पुल के रूप में ढालना पर्यावरण के साथ सहजीवन का अद्भुत उदाहरण है। - महाराष्ट्र के मराठा सैन्य परिदृश्य (Maratha Military Landscapes)
सह्याद्रि पर्वतों पर फैले ये किले और दुर्ग न केवल वास्तुकला की दृष्टि से अद्वितीय हैं, बल्कि मराठा साम्राज्य की रणनीतिक सोच और शौर्य की गवाही भी देते हैं। - कर्नाटक के पश्चिमी घाट के वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries of Western Ghats)
यह क्षेत्र यूनेस्को द्वारा पहले ही जैव विविधता हॉटस्पॉट माना जा चुका है। यहां पाई जाने वाली अनगिनत दुर्लभ प्रजातियाँ वैश्विक पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं। - उत्तराखंड के हिमालयी परिदृश्य
गंगोत्री और बदरीनाथ जैसे पवित्र स्थलों से लेकर बर्फीली चोटियों तक फैला यह परिदृश्य आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम है। - (अन्य तीन स्थल)
शेष तीन स्थलों में भी भारत की विविधता और धरोहर की झलक मिलती है। इनमें सांस्कृतिक महत्त्व, पर्यावरणीय संतुलन और ऐतिहासिक संदर्भ—तीनों का गहन मेल मौजूद है।
🌍 इसका महत्व क्यों है?
- संरक्षण को गति: यूनेस्को की सूची में आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण योजनाओं और फंडिंग को प्राथमिकता मिलती है।
- स्थानीय विकास: पर्यटन बढ़ने से रोजगार, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और सेवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।
- वैश्विक पहचान: भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और सम्मान प्राप्त होगा।
✨ निष्कर्ष
भारत का यह कदम केवल विरासत संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरणीय संतुलन और सांस्कृतिक गर्व का भी संदेश देता है। यह हमारे लिए गर्व का क्षण है कि दुनिया अब उन धरोहरों को मान्यता दे रही है, जिन्हें हम सदियों से अपनी आत्मा और संस्कृति का हिस्सा मानते आए हैं।