
23 सितंबर 2025 को फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने ट्विटर (अब X) पर एक छोटा लेकिन गहरा संदेश साझा किया—
“Le temps de la paix est venu”
अर्थात्, “शांति का समय आ गया है।”
यह वाक्य सिर्फ एक राजनयिक टिप्पणी नहीं था, बल्कि एक ऐसा विचार था जो पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का कारण बना। विशेष रूप से तब, जब गाज़ा पट्टी एक बार फिर मानवीय संकट के दौर से गुजर रही है।
🌍 वैश्विक परिप्रेक्ष्य में मैक्रों का संदेश
- यह बयान उस समय आया जब दुनिया एक साथ कई संकटों का सामना कर रही है—यूक्रेन-रूस युद्ध, अफ्रीकी देशों में अस्थिरता और तख्तापलट, तथा गाज़ा में लगातार बिगड़ता हालात।
- फ्रांस, एक परमाणु शक्ति और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होने के कारण, जब शांति की अपील करता है तो उसकी गूँज सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वैश्विक स्तर पर असर डालती है।
🧒 गाज़ा संकट और मासूमों की पीड़ा
- मैक्रों के इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक उपयोगकर्ता ने गाज़ा सिटी के दक्षिणी हिस्से का वीडियो साझा किया। उसमें बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाते हुए दिखाया गया।
- मासूम चेहरों पर छाया भय और असुरक्षा का यह दृश्य उस संदेश को और भी गहरा बना देता है। सवाल यह उठता है कि—क्या शांति सिर्फ उच्च-स्तरीय वार्ताओं तक सीमित रहेगी, या उन बच्चों के जीवन में भी लौट पाएगी जो बचपन की बजाय संघर्ष देख रहे हैं?
🕊️ शांति का अर्थ: केवल युद्धविराम से आगे
- असली शांति का मतलब सिर्फ हथियारों की चुप्पी नहीं है। यह न्याय, पुनर्वास, सुरक्षा और संवाद से पूर्ण होती है।
- गाज़ा जैसे क्षेत्रों में तभी वास्तविक शांति संभव होगी जब मानवीय सहायता, शिक्षा और पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी जाए।
🇮🇳 भारत की दृष्टि और भूमिका
- भारत ने हमेशा इस मुद्दे पर संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है।
- “वसुधैव कुटुम्बकम्” की अवधारणा भारत को वैश्विक दक्षिण की आवाज़ बनने का अवसर देती है, जहाँ करुणा और सहयोग की सबसे अधिक आवश्यकता है।
- इस समय भारत मध्यस्थता, मानवीय सहयोग और शांति पहल के माध्यम से रचनात्मक भूमिका निभा सकता है।
✍️ निष्कर्ष
एमैनुएल मैक्रों का “शांति का समय आ गया है” वाला कथन एक साधारण राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि मानवता के लिए नैतिक आह्वान है।
जब गाज़ा के मासूम बच्चे विस्थापन और भय झेल रहे हों, जब दुनिया युद्धों से थक चुकी हो—तब यह संदेश हमें याद दिलाता है कि शांति कोई विलासिता नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्यता है।
👉 शांति की शुरुआत शब्दों से हो सकती है, परंतु उसकी पूर्णता केवल कार्यों से संभव है।