
प्रस्तावना
लोकतंत्र की मज़बूती चुनावी पारदर्शिता पर टिकी होती है। मतदाता सूची में अगर गड़बड़ियां हों तो चुनाव की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। झांसी ज़िले में हाल ही में हुई निर्वाचन आयोग की प्रारंभिक जांच ने एक बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि ज़िले में लगभग 1.74 लाख डुप्लीकेट मतदाता दर्ज हैं। यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि भविष्य में होने वाले पंचायत और अन्य चुनावों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाता है।
डुप्लीकेट मतदाताओं का सच
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने डोर-टू-डोर सत्यापन के लिए 770 बीएलओ (Booth Level Officers) को नियुक्त किया है। इनकी प्राथमिक जांच में पाया गया कि कई मतदाताओं के नाम एक से अधिक जगहों पर दर्ज हैं।
झांसी के विभिन्न विकास खंडों में मिले डुप्लीकेट मतदाता:
- बबीना – 31,529
- बरुआसागर – 17,476
- मऊरानीपुर – 19,910
- बंगरा – 22,369
- चिरगांव – 26,968
- बड़ागांव – 24,955
- गुरसरांय – 16,816
- टहरका – 14,807
कुल: 1,74,830 डुप्लीकेट मतदाता
प्रभाव और चुनौतियाँ
- चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न – अगर एक ही मतदाता कई जगह वोट डाल सके तो चुनावी परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
- प्रशासनिक लापरवाही का सबूत – मतदाता सूची के समय पर सत्यापन की कमी से यह स्थिति उत्पन्न हुई।
- ग्राम पंचायत चुनावों पर असर – पंचायत चुनावों से पहले मतदाता सूचियों का दुरुस्त होना बेहद ज़रूरी है।
- तकनीकी चुनौतियाँ – ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटलीकरण की सीमाओं के चलते मतदाता सूची अपडेट करने में कठिनाइयाँ आती हैं।
समाधान की दिशा
- निर्वाचन आयोग ने सभी डुप्लीकेट नामों को एक स्थान पर स्थायी रूप से रखने और अन्य जगह से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
- बीएलओ को आधुनिक तकनीक का उपयोग करने और मोबाइल एप के ज़रिए डाटा अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।
- नागरिकों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वे अपने नाम केवल सही पते पर दर्ज करवाएँ।
निष्कर्ष
झांसी में सामने आए 1.74 लाख डुप्लीकेट मतदाता लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी हैं। यदि मतदाता सूची पारदर्शी और त्रुटिहीन नहीं होगी, तो चुनावी व्यवस्था पर जनता का विश्वास डगमगा सकता है। इस समय आवश्यक है कि निर्वाचन आयोग सख़्त और तेज़ी से कदम उठाए, ताकि लोकतंत्र की नींव मजबूत बनी रहे।