
“स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच न होना, इंसानियत की सबसे बड़ी असमानता है।”
— इसी विचार को केंद्र में रखते हुए अमेरिका की पूर्व स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने कॉनकॉर्डिया समिट 2025 में एक प्रभावशाली भाषण दिया।
🔹 वैश्विक मंच और उसका महत्व
कॉनकॉर्डिया समिट वह स्थान है जहाँ नीति-निर्माता, विशेषज्ञ और समाजसेवी दुनिया के सबसे अहम मुद्दों पर चर्चा करते हैं। इस बार पेलोसी का वक्तव्य स्वास्थ्य सेवाओं को मानवाधिकार के रूप में मान्यता दिलाने की दिशा में बेहद अहम रहा।
🔹 एक सदी लंबी जद्दोजहद
अपने संबोधन में पेलोसी ने अमेरिका की उस लंबी यात्रा को याद किया जिसमें पिछले सौ वर्षों से लगातार अलग-अलग राष्ट्रपति स्वास्थ्य सेवाओं को सभी नागरिकों तक पहुँचाने की कोशिश करते रहे।
लेकिन निजी बीमा कंपनियों का दबदबा, राजनीतिक टकराव और सामाजिक असमानताएं इस राह में बार-बार बाधा बनीं।
उन्होंने “अफोर्डेबल केयर एक्ट” (Affordable Care Act – ACA) का विशेष उल्लेख किया, जो ओबामा प्रशासन के दौरान लागू हुआ और जिसने पहली बार लाखों लोगों को स्वास्थ्य बीमा का वास्तविक लाभ पहुंचाया।
🔹 प्रेरणा का स्रोत
पेलोसी ने अपने विचारों की जड़ मार्टिन लूथर किंग जूनियर के उस कथन में बताई, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य असमानता को सबसे अमानवीय विषमता कहा था। यह सोच, पेलोसी के अनुसार, न केवल नैतिकता की मांग है बल्कि सामाजिक न्याय की बुनियाद भी है।
🔹 भारत और अन्य देशों के लिए संदेश
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पतालों और डॉक्टरों की कमी
- निजी अस्पतालों की ऊँची फीस
- सरकारी योजनाओं की सीमित पहुंच
ये सब मिलकर करोड़ों लोगों को गुणवत्तापूर्ण इलाज से वंचित रखते हैं।
पेलोसी का संदेश भारत सहित उन सभी देशों के लिए महत्वपूर्ण है जो अब भी स्वास्थ्य सेवा को एक “सुविधा” मानते हैं, न कि एक “मौलिक अधिकार”।
🔹 निष्कर्ष
नैन्सी पेलोसी का यह वक्तव्य केवल अमेरिकी नीति पर टिप्पणी नहीं था, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक पुकार थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवा पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए—यह राजनीति, अर्थशास्त्र और लाभ से ऊपर उठकर मानवता का प्रश्न है।