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📖 मेहर का महीना: शिक्षा और जागृति का उत्सव


ईरानी समाज में जब माहे-मेहर का आरंभ होता है, तो यह केवल समय का बदलाव नहीं होता, बल्कि एक बौद्धिक यात्रा की नई शुरुआत का प्रतीक बन जाता है। यह महीना वहाँ विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और शिक्षा से जुड़ी तमाम गतिविधियों के लिए आधारशिला का काम करता है।

🌅 नई सुबह, नया अध्याय
ईरानी कैलेंडर के अनुसार मेहर महीना सितंबर और अक्टूबर के बीच आता है। इसी दौरान शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत होती है। इस अवसर पर राष्ट्र के सर्वोच्च नेतृत्व द्वारा दिया गया संदेश केवल उद्घोषणा नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत माना जाता है। इसमें विद्यार्थियों को यह स्मरण कराया जाता है कि शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी क्षमताओं को गढ़ने और राष्ट्र को मजबूत करने का साधन है।

“मेहर का आगमन केवल किताबें और कक्षाओं की ओर लौटने का संकेत नहीं, बल्कि यह लाखों विद्यार्थियों की रचनात्मकता और ऊर्जा को दिशा देने का समय है।”

🏫 शिक्षा का सामाजिक-सांस्कृतिक आयाम
ईरान में शिक्षा को समाज की सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है। मेहर के महीने में पूरे देश में विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के साथ-साथ पुस्तक मेलों, संगोष्ठियों और व्याख्यानों का आयोजन होता है। इस समय का उत्साह इस तथ्य को रेखांकित करता है कि शिक्षा को वहाँ व्यक्ति की प्रगति से कहीं अधिक—राष्ट्र की उन्नति का माध्यम माना जाता है।

👩‍🏫 नेतृत्व और शिक्षा का तालमेल
जब देश का सर्वोच्च नेतृत्व स्वयं शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता है, तो यह स्पष्ट संदेश जाता है कि ज्ञान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह दृष्टिकोण अन्य देशों, विशेषकर भारत जैसे युवा प्रधान राष्ट्रों के लिए प्रेरणा बन सकता है। यदि नेतृत्व स्तर पर शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का औजार माना जाए, तो यह विकास की गति को कई गुना बढ़ा सकता है।

🌍 मेहर: एक सार्वभौमिक संदेश
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें तो मेहर का महीना केवल ईरान की परंपरा तक सीमित नहीं है। इसका संदेश सार्वभौमिक है—हर समाज को अपने युवाओं को शिक्षा की ओर आकर्षित करना चाहिए। भारत जैसे देशों के लिए, जहाँ जनसंख्या का बड़ा हिस्सा युवा है, यह एक आदर्श मॉडल हो सकता है।


निष्कर्ष
मेहर का महीना केवल एक शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि शिक्षा किताबों से कहीं आगे है—यह एक आंदोलन है, एक संस्कृति है और किसी भी राष्ट्र की आत्मा की धड़कन है।


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