
23 सितंबर को आयोजित International Coalition for the Return of Ukrainian Children Summit में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने वैश्विक समुदाय का ध्यान एक ऐसे विषय की ओर खींचा, जिसे अनदेखा करना असंभव है—बच्चों का अपहरण और उन्हें जबरन निर्वासित कर दूसरी संस्कृति में ढालने का प्रयास।
👧 युद्ध और मासूमियत पर हमला
ज़ेलेंस्की ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों को उनकी पहचान, संस्कृति और भाषा से काटकर दूसरी विचारधारा में ढालने की कोशिश केवल एक अन्याय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अपराध है। किसी भी संघर्ष की सबसे दर्दनाक तस्वीर वही होती है, जब मासूम बच्चों को उनकी मातृभूमि और परिवार से अलग कर दिया जाता है। यह कृत्य न सिर्फ मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि सभ्यता के मूल्यों के साथ भी विश्वासघात है।
🏛️ संयुक्त राष्ट्र की परीक्षा
यूक्रेन की स्पष्ट मांग है कि संयुक्त राष्ट्र इस मुद्दे को केवल “चिंता” मानकर न छोड़े, बल्कि इसे अपराध के रूप में मान्यता दे और इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित करे। ऐसा कदम रूस जैसे आरोपित देशों पर दबाव बनाएगा और भविष्य में दुनिया के किसी भी हिस्से में बच्चों को युद्ध की राजनीति से बचाने की ठोस नींव रखेगा।
🤝 साझा ज़िम्मेदारी की ओर कदम
सम्मेलन में कई देशों की भागीदारी इस तथ्य को रेखांकित करती है कि यह मुद्दा केवल यूक्रेन का नहीं है, बल्कि पूरी मानवता का है। अब सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समर्थन को ठोस कार्यवाही में कब और कैसे बदलता है। क्या दुनिया मासूम बच्चों की आवाज़ बनेगी या यह केवल एक कूटनीतिक संवाद बनकर रह जाएगा?
📌 अंतिम विचार: मानवता की असली पहचान
बच्चे हर समाज की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। उन्हें युद्ध, राजनीति और वैचारिक संघर्षों से दूर रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। यूक्रेन ने इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर लाकर एक साहसिक उदाहरण प्रस्तुत किया है। अब विश्व समुदाय की अगली परीक्षा यही है कि वह इस चुनौती को कितनी गंभीरता से लेता है और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कौन-से व्यावहारिक कदम उठाता है।