
2015 में अपनाए गए पेरिस समझौते ने वैश्विक जलवायु नीति को नई दिशा दी। आज, एक दशक बाद, संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन 2025 में प्रस्तुत आँकड़े बताते हैं कि दुनिया ने स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास की राह पर ठोस कदम उठाए हैं।
🔋 नवीकरणीय ऊर्जा में ऐतिहासिक प्रगति
- ऊर्जा उत्पादन में 140% वृद्धि
सौर, पवन और जल ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों ने बीते दस वर्षों में अपनी क्षमता दोगुनी से भी अधिक बढ़ा ली है। इससे न केवल जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटी है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन भी मजबूत हुआ है। - हरित निवेश में 80% उछाल
सरकारों, निजी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने जलवायु अनुकूल परियोजनाओं में बड़ी पूँजी लगाई है। इस निवेश ने नई तकनीकों को गति दी है और हरित रोजगार के लाखों अवसर बनाए हैं।
💰 कार्बन मूल्य निर्धारण में व्यापक विस्तार
- 40 से बढ़कर 80 देश
अब दोगुने से अधिक देशों ने कार्बन मूल्य निर्धारण को अपनाया है। यह नीति प्रदूषण को आर्थिक रूप से हतोत्साहित करती है और उद्योगों को स्वच्छ विकल्पों की ओर ले जाती है।
🌱 जलवायु नीति की नई परिभाषा
पेरिस समझौते ने सिर्फ़ कानूनी नियम नहीं बनाए, बल्कि एक साझा नैतिक दिशा भी दी। आज जलवायु नीति केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है—यह आर्थिक प्रगति, सामाजिक न्याय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नींव भी बन चुकी है।
🇮🇳 भारत की निर्णायक भूमिका
भारत ने इस दशक में सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में उल्लेखनीय छलांग लगाई है। वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी ने विकासशील देशों के हितों को मजबूती से सामने रखा है और “साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारी” के सिद्धांत को नया जीवन दिया है।
✍️ निष्कर्ष
पिछले दस वर्षों की उपलब्धियाँ इस बात की गवाही देती हैं कि यदि वैश्विक समुदाय एकजुट होकर प्रयास करे, तो जलवायु संकट का सामना किया जा सकता है। पेरिस समझौते की दसवीं वर्षगांठ सिर्फ़ एक स्मृति नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है—और भी साहसिक कदम उठाने की।