
ईरानी राजनीति का स्वभाव यही है कि अतीत की परतें बार-बार खुलती हैं और बदलते समय में नए मायने गढ़ती हैं। हाल ही में “KhameneiNews” नामक एक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा हुई वीडियो क्लिप ने ठीक ऐसा ही किया। यह क्लिप ईरान के सर्वोच्च नेता के 1394/04/02 (ईरानी कैलेंडर) के भाषण का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने कहा था:
“با آمریکایی ها بستیم”
(अनुवाद: “हमने अमेरिकियों से समझौता किया।”)
🔍 बीते वक्त का बयान, आज क्यों अहम?
यह एक दशक पुरानी बात है, लेकिन आज के राजनीतिक माहौल में इसका दोबारा उभरना यूं ही नहीं है। यह बयान 2015 के ऐतिहासिक परमाणु समझौते (JCPOA) की ओर इशारा करता है, जब ईरान और अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों ने रिश्तों में तनाव कम करने का प्रयास किया था।
मगर वर्तमान परिप्रेक्ष्य अलग है—अमेरिका में नेतृत्व बदलने के साथ नीतियों का उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया में संघर्ष और वैश्विक राजनीति की ध्रुवीकृत स्थिति ने इस पुराने बयान को नया राजनीतिक अर्थ दे दिया है।
🗣️ जनता और राजनीति पर असर
वीडियो की शुरुआत इस वाक्य से होती है: “दस साल एक जीवनकाल होते हैं।” यह केवल समय की गहराई को नहीं दर्शाता, बल्कि यह भी बताता है कि ईरान अपने पुराने अनुभवों को भूला नहीं है। समझौते केवल कागजों पर दर्ज घटनाएं नहीं होते, बल्कि वे समाज और राजनीति की दिशा तय करने वाले सबक भी होते हैं।
🌐 क्षेत्रीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य
यह बयान ऐसे समय दोहराया गया है जब पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में तनाव चरम पर है—इज़राइल-फिलिस्तीन टकराव, यमन की जटिल स्थिति और अमेरिका की क्षेत्रीय रणनीतियाँ। ऐसे माहौल में ईरान का यह पुनर्स्मरण एक राजनीतिक संदेश है, जो यह दर्शाता है कि उसकी विदेश नीति न केवल वर्तमान बल्कि अतीत के अनुभवों पर भी टिकी हुई है।
📌 निष्कर्ष
इस क्लिप को केवल “पुराने भाषण की याद” समझना भूल होगी। यह एक सोचा-समझा राजनीतिक संकेत है, जिसके जरिए ईरान यह दिखा रहा है कि वह इतिहास को केवल संजोता ही नहीं, बल्कि उसे वर्तमान नीतियों और भविष्य की रणनीतियों में उपयोग भी करता है।
संक्षेप में, यह बयान यह स्पष्ट करता है कि ईरान अपने अनुभवों को बार-बार जनता के सामने रखकर अपनी स्थिति मजबूत करता है और वैश्विक राजनीति को अपनी शर्तों पर परिभाषित करने की कोशिश करता है।