
भारत की पहचान केवल कृषि प्रधान देश के रूप में नहीं, बल्कि सहकारिता की समृद्ध परंपरा के लिए भी जानी जाती है। सहकारिता हमारे समाज की वह ताक़त है, जिसने छोटे किसानों, कारीगरों और श्रमिकों को सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का मार्ग दिखाया है। इसी परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2022 में राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (National Co-operative Exports Limited – NCEL) की स्थापना की।
केवल दो वर्षों में ही इस संस्था ने यह साबित कर दिया है कि सहकारिता केवल स्थानीय सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि विश्व बाज़ार में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकती है।
🚢 NCEL क्या है?
NCEL एक बहु-राज्य सहकारी संस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य है—
- किसानों, बुनकरों, कारीगरों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों जैसे छोटे उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जोड़ना।
- निर्यात प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना।
- लॉजिस्टिक्स, विपणन और मुनाफे के न्यायपूर्ण वितरण में सहायता प्रदान करना।
📊 शुरुआती वर्षों की उपलब्धियाँ
- सदस्यता में विस्तार: देशभर के सैकड़ों सहकारी संगठनों को जोड़कर NCEL ने एक राष्ट्रीय स्तर का नेटवर्क खड़ा किया।
- निर्यात में सफलता: कृषि उत्पादों से लेकर डेयरी और अन्य सहकारी वस्तुओं का बड़े पैमाने पर निर्यात किया गया।
- सीधे लाभ का वितरण: मुनाफे को बिचौलियों के बजाय सीधे उत्पादकों तक पहुँचाया गया, जिससे आर्थिक समानता को बल मिला।
🌍 भारत की सहकारी शक्ति का वैश्विक प्रभाव
NCEL की पहल से भारत अब केवल एक साधारण निर्यातक देश नहीं, बल्कि एक सहकारी निर्यातक मॉडल प्रस्तुत करने वाला राष्ट्र बन चुका है। इससे छोटे किसान और ग्रामीण उत्पादक भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान बना रहे हैं। यह पहल भारत की “साझेदारी में समृद्धि” की सोच को वैश्विक स्तर पर दर्शाती है।
🛫 आने वाले वर्षों की योजनाएँ
- कृषि उत्पादों से आगे बढ़कर हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद, डेयरी और मत्स्य पालन को वैश्विक बाज़ार में पहुँचाना।
- डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और आधुनिक तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता को और मजबूत करना।
- अंतरराष्ट्रीय सहकारी संगठनों से साझेदारी कर भारत को वैश्विक सहकारी व्यापार का केंद्र बनाना।
✨ निष्कर्ष
राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड केवल एक संस्था नहीं, बल्कि भारत की सहकारी भावना का जीवंत उदाहरण है। यह पहल दिखाती है कि आर्थिक विकास तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे। सहकारिता के इस वैश्विक विस्तार से भारत दुनिया को एक नया संदेश दे रहा है—
“लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित न रहकर, पूरे समुदाय तक पहुँचना चाहिए।”