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🌸 नवरात्रि के आठवें दिन: माँ महागौरी की साधना का दिव्य महत्व


नवरात्रि का आठवां दिन माँ दुर्गा के महागौरी स्वरूप को समर्पित होता है। यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति, निर्मलता और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। माँ महागौरी का रूप सौंदर्य, करुणा और शक्ति का अद्भुत संगम है। उनका वर्ण चाँदनी जैसा उज्ज्वल है, वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और उनका वाहन बैल है। हाथों में त्रिशूल और डमरू धारण किए हुए वे भक्तों को निर्भयता और आशीर्वाद प्रदान करती हैं।


🔱 पौराणिक प्रसंग

कथाओं के अनुसार, माँ पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए गहन तपस्या की। कठोर साधना के कारण उनका शरीर काला पड़ गया। जब महादेव ने उनकी तपस्या स्वीकार की, तब गंगाजी के जल से स्नान करने पर उनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण का हो गया। तभी से वे महागौरी नाम से विख्यात हुईं। उनका यह स्वरूप संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धा, तप और धैर्य से हर कठिन लक्ष्य साधा जा सकता है।


🌼 माँ महागौरी की उपासना से प्राप्त फल


🪔 पूजा-विधि


✨ भक्तों के लिए संदेश

महागौरी की पूजा केवल पारंपरिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और आंतरिक बल को जाग्रत करने का मार्ग है। उनका स्वरूप हमें धैर्य, त्याग और श्रद्धा का महत्व सिखाता है। माँ की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि, सौंदर्य, करुणा और शांति का संचार होता है।


📜 स्तुति पंक्ति

उज्ज्वल रूप, श्वेताभा धारी,
बैल वाहन, करुणा निधि हमारी।
त्रिशूल-डमरू से करती रक्षा,
महागौरी कृपा से कटे हर बाधा।।


🙏 नवरात्रि के इस पावन अवसर पर माँ महागौरी की आराधना करने से साधक को दिव्य आनंद, आत्मविश्वास और जीवन में नई दिशा प्राप्त होती है।


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