
फ्रांस सरकार ने हाल ही में एक ऐसी योजना लागू की है, जिसने पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय दोनों को एक साथ साध लिया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के नेतृत्व में शुरू हुई “सोशल लीजिंग” (Social Leasing) योजना का उद्देश्य है कि आम नागरिक, विशेषकर निम्न और मध्यम आय वर्ग, भी इलेक्ट्रिक कारों का उपयोग कर सकें।
🔋 क्या है सोशल लीजिंग?
इस योजना के तहत सरकार नागरिकों को इलेक्ट्रिक कारें बेहद किफायती दरों पर किराए पर उपलब्ध करा रही है। उदाहरणस्वरूप, Renault R5 जैसी आधुनिक इलेक्ट्रिक कार मात्र €120 (करीब ₹10,800) प्रतिमाह की दर पर उपलब्ध कराई जा रही है। यह मूल्य परंपरागत कार लीजिंग से काफी कम है और उन परिवारों के लिए राहत का साधन है, जिनके पास सीधे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की क्षमता नहीं है।
📊 योजना के प्रमुख लाभ
- आर्थिक सशक्तिकरण – सस्ती दरों पर कार उपलब्ध होने से नागरिकों की क्रय शक्ति बढ़ती है और जीवन स्तर में सुधार होता है।
- स्थानीय उद्योग को मजबूती – फ्रांसीसी कंपनियों, विशेषकर Renault जैसी ऑटोमोबाइल निर्माताओं की मांग बढ़ने से घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिलता है।
- रोज़गार के अवसर – इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, सर्विसिंग और चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क में बड़ी संख्या में नौकरियाँ पैदा होती हैं।
- पर्यावरणीय संरक्षण – पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक कारें कार्बन उत्सर्जन को घटाती हैं और वायु प्रदूषण पर काबू पाने में मदद करती हैं।
🗳️ नीति या केवल चुनावी वादा?
राष्ट्रपति मैक्रों ने इस योजना को अपने चुनावी एजेंडे में शामिल किया था और अब इसे सफलतापूर्वक लागू करके उन्होंने यह संदेश दिया है कि यह केवल एक चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि फ्रांस की दीर्घकालिक पर्यावरणीय और सामाजिक नीति का हिस्सा है।
🌍 वैश्विक महत्व
आज जब कई देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रसार धीमी गति से हो रहा है, फ्रांस की यह पहल एक वैश्विक आदर्श बन सकती है। विशेषकर भारत जैसे देशों के लिए, जहाँ प्रदूषण की समस्या गंभीर है और बड़ी आबादी अब भी सस्ती परिवहन सुविधाओं पर निर्भर है, यह मॉडल प्रेरणा का कार्य कर सकता है।