
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने हाल ही में ज़ापोरिज़्ज़िया परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेताया है। यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु केंद्र माने जाने वाला यह संयंत्र पिछले एक सप्ताह से राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड से पूरी तरह कटा हुआ है और केवल डीज़ल जनरेटरों की मदद से चल रहा है। ज़ेलेंस्की के अनुसार, यह स्थिति सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए संभावित आपदा का संकेत है।
⚠️ संकट के कारण: रूसी हमले
- रूसी गोलाबारी के चलते संयंत्र की मुख्य विद्युत आपूर्ति बाधित हो चुकी है।
- फिलहाल सुरक्षा प्रणालियाँ सिर्फ डीज़ल जनरेटरों पर निर्भर हैं, जिनकी क्षमता अल्पकालिक संचालन तक ही सीमित है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक यह व्यवस्था टिकाऊ नहीं है और दुर्घटना की आशंका लगातार बढ़ रही है।
🔌 परमाणु सुरक्षा पर गहराता साया
- किसी भी परमाणु संयंत्र की सुरक्षा स्थिर और निरंतर विद्युत आपूर्ति पर टिकी होती है।
- यदि यह आपूर्ति रुक जाती है तो कूलिंग सिस्टम और अन्य अहम सुरक्षा व्यवस्थाएँ ठप हो सकती हैं, जिससे रेडियोधर्मी रिसाव का खतरा बढ़ जाता है।
- राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा, “यह सिर्फ यूक्रेनवासियों के लिए नहीं, बल्कि हर इंसान के लिए खतरा है।”
🌍 वैश्विक कार्रवाई की मांग
- ज़ेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र, IAEA और विश्व के प्रमुख नेताओं से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है।
- उनका कहना है कि रूस का यह रवैया परमाणु सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है और इसे “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” कहा जा सकता है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कदम न उठाए गए तो इसका असर पूरे यूरोप और पड़ोसी क्षेत्रों तक फैल सकता है।
🎥 जनता से सीधा संवाद
- राष्ट्रपति का विशेष वीडियो संदेश ट्विटर पर “Dear Ukrainians!” शीर्षक से साझा किया गया।
- कुछ ही घंटों में इस वीडियो को लाखों बार देखा गया और हज़ारों लोगों ने इसे साझा किया।
- जनसमर्थन से स्पष्ट है कि आम नागरिक भी इस मुद्दे को गहराई से महसूस कर रहे हैं और ठोस समाधान चाहते हैं।
🧭 निष्कर्ष
ज़ापोरिज़्ज़िया की मौजूदा स्थिति केवल यूक्रेन और रूस के बीच का संघर्ष नहीं है, बल्कि यह वैश्विक परमाणु सुरक्षा की परीक्षा है। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस संकट को गंभीरता से नहीं लिया तो इसके परिणाम मानवीय और पर्यावरणीय दोनों स्तरों पर बेहद भयावह हो सकते हैं। यह वह पल है जब राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मानवता और पृथ्वी की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर कदम उठाना अनिवार्य है।