
शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में कन्या पूजन और मातृ शक्ति की वंदना कर भारतीय संस्कृति की जीवंत धारा को पुनः रेखांकित किया। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रहा, बल्कि इसमें सामाजिक संदेश, नारी सम्मान और सांस्कृतिक चेतना का गहरा मेल दिखाई दिया।
🌸 कन्या पूजन: सनातन परंपरा की जीवंत झलक
गोरक्षपीठ की दीर्घकालीन परंपरा का पालन करते हुए मुख्यमंत्री ने नौ कन्याओं का पूजन कर उन्हें देवी दुर्गा का स्वरूप माना। उन्होंने स्वयं उनके चरण पखारे, तिलक लगाया और सम्मान स्वरूप वस्त्र, फल व प्रसाद अर्पित किया। यह दृश्य भारतीय समाज के उस शाश्वत मूल्य को पुष्ट करता है जिसमें कन्या को “देवी” मानकर सर्वोच्च आदर दिया जाता है।
🙏 मातृ शक्ति और बटुक पूजन का महत्व
योगी आदित्यनाथ ने मातृ शक्ति की आराधना के साथ बटुक पूजन भी किया। नवरात्रि के दौरान यह पूजन स्त्री और पुरुष, दोनों के दिव्य स्वरूपों के संतुलन को दर्शाता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि— “नारी का सम्मान समाज की प्रगति का मूल आधार है। जब हम कन्या को देवी मानते हैं, तब हम स्त्री के अस्तित्व को सर्वोच्च मान्यता प्रदान करते हैं।”
💬 नारी सशक्तिकरण का स्पष्ट संदेश
इस आयोजन से मुख्यमंत्री ने महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण का संदेश भी दिया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि स्त्री केवल पूजनीय ही नहीं, बल्कि समान अवसर की अधिकारी भी है। शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार सतत प्रयासरत है।
🕉️ परंपरा से प्रेरित सामाजिक चेतना
गोरखनाथ मंदिर में संपन्न यह पूजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखने का माध्यम भी है। इस प्रकार के आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और यह संदेश देते हैं कि परंपराएं केवल आस्था तक सीमित न होकर समाज को मार्गदर्शन देने का भी कार्य करती हैं।