
✨ भूमिका
2 अक्टूबर 2025 को मानवता ने एक ऐसी हस्ती को खो दिया, जिसने विज्ञान, प्रकृति और शांति—तीनों क्षेत्रों में गहरा प्रभाव छोड़ा। प्रसिद्ध प्राइमेट वैज्ञानिक और पर्यावरण कार्यकर्ता डॉ. जेन गुडॉल के निधन ने पूरी दुनिया को शोकाकुल कर दिया। उनकी स्मृति में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने उन्हें “Messenger of Peace” बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके कार्यों को मानव सभ्यता के लिए अमूल्य बताया।
🕊️ प्रकृति की सच्ची दूत
जेन गुडॉल का जीवन केवल शोध तक सीमित नहीं था, बल्कि वह प्रकृति और इंसान के रिश्ते को समझने और संवारने का एक मिशन था। चिम्पैंज़ी पर उनके दशकों लंबे अध्ययन ने यह साबित किया कि जानवर भी भावनाओं, बुद्धिमत्ता और सामाजिक संरचना से संपन्न होते हैं। उन्होंने विज्ञान को नई दिशा दी और यह दिखाया कि मनुष्य और प्रकृति का संबंध प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व पर आधारित होना चाहिए।
🌱 संयुक्त राष्ट्र और जेन गुडॉल
उनके कार्यों और दृष्टिकोण ने उन्हें वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाया। इसी कारण संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें “Messenger of Peace” का सम्मान प्रदान किया। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी और युवाओं को प्रकृति के प्रति जागरूक करने की उनकी पहलें दुनिया भर में सराही गईं।
📢 गुटेरेस का श्रद्धांजलि संदेश
महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोशल मीडिया पर लिखा—
“जेन गुडॉल के निधन की खबर से मैं गहरा दुखी हूं। वह हमारी प्रिय Messenger of Peace थीं। उन्होंने मानवता और पृथ्वी दोनों के लिए एक अमूल्य विरासत छोड़ी है। पर्यावरण संरक्षण और संयुक्त राष्ट्र के मिशनों में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।”
यह संदेश दर्शाता है कि जेन गुडॉल का प्रभाव केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह शांति, करुणा और वैश्विक जागरूकता की प्रतीक बन चुकी थीं।
🌟 अमर विरासत
उनकी स्थापित संस्था Jane Goodall Institute आज भी वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और सतत विकास की दिशा में कार्यरत है। उन्होंने यह विश्वास जगाया कि हर व्यक्ति परिवर्तन का वाहक हो सकता है—चाहे वह छोटा हो या बड़ा। यही विचार उनकी सबसे बड़ी विरासत है।
🙏 निष्कर्ष
जेन गुडॉल का निधन निश्चित ही एक युग के अंत के समान है। लेकिन उनके विचार, अनुसंधान और सामाजिक योगदान सदैव जीवित रहेंगे। वह न केवल एक महान वैज्ञानिक थीं, बल्कि प्रकृति की सच्ची मित्र और मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत भी थीं। संयुक्त राष्ट्र की ओर से दी गई श्रद्धांजलि यह साबित करती है कि उनका प्रभाव वैश्विक था और उनकी शिक्षाएँ आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देती रहेंगी।