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🔍 जेरोम पॉवेल की विदाई पर ट्रंप की टिप्पणी: अर्थनीति और राजनीति का संगम


अमेरिकी राजनीति में सोशल मीडिया अब केवल अभिव्यक्ति का जरिया नहीं रहा, बल्कि सत्ता और नीतियों पर दबाव बनाने का एक सशक्त औजार बन चुका है। इसी कड़ी में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपनी सोशल मीडिया साइट Truth Social पर एक टिप्पणी साझा की, जिसमें उन्होंने फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के कार्यकाल को लेकर कहा—
“Jerome Powell, expiration date, May 2026 can’t come fast enough”

यह टिप्पणी अपने आप में कई सवाल खड़े करती है—क्या यह महज व्यक्तिगत असहमति है, या आने वाले समय में आर्थिक और राजनीतिक बदलाव का संकेत?


🧠 ट्रंप की नाराज़गी का संकेत

  1. मौद्रिक नीतियों पर असहमति
    ट्रंप लंबे समय से फेडरल रिजर्व की नीतियों के आलोचक रहे हैं। ब्याज दरों में वृद्धि, महंगाई पर नियंत्रण और निवेश माहौल पर पॉवेल के निर्णय ट्रंप को कभी रास नहीं आए।
  2. आर्थिक दृष्टिकोण का टकराव
    रिपब्लिकन खेमे में पहले से ही यह मत है कि फेडरल रिजर्व की नीतियाँ अमेरिकी विकास दर को धीमा कर रही हैं। ट्रंप की टिप्पणी इसी असहमति को और मजबूत करती है।
  3. 2026 की रणनीति
    “मई 2026 जल्द आए” कहना स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि ट्रंप पॉवेल के कार्यकाल खत्म होने के बाद बदलाव की तैयारी में हैं। यह इशारा भी हो सकता है कि वे अपने समर्थकों को पहले से संदेश देना चाहते हैं कि आर्थिक मोर्चे पर वे अलग दिशा चुनेंगे।

📊 जेरोम पॉवेल का कार्यकाल: उपलब्धियाँ और आलोचनाएँ

पहलू विवरण कार्यकाल की शुरुआत फरवरी 2018 प्रमुख नीतियाँ ब्याज दरों में बढ़ोतरी, महंगाई नियंत्रण आलोचना के केंद्रबिंदु कोविड-19 संकट में उठाए गए कदम, बैंकिंग निगरानी में नरमी समर्थन कई डेमोक्रेट्स ने उन्हें स्थिरता प्रदान करने वाला चेहरा बताया


📱 सोशल मीडिया की गूंज

ट्रंप की इस टिप्पणी ने कुछ ही घंटों में हजारों व्यूज़ बटोरे। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे लाइक, रीपोस्ट और कमेंट किया। यह दर्शाता है कि अमेरिकी जनता के बीच फेडरल रिजर्व के फैसलों और ट्रंप की प्रतिक्रियाओं पर गहरी दिलचस्पी बनी हुई है।


🧭 निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप की यह टिप्पणी केवल पॉवेल के प्रति असंतोष का इज़हार नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है। यह संकेत देती है कि 2026 के बाद अमेरिका की मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव संभव है—विशेषकर अगर ट्रंप या रिपब्लिकन सत्ता में बने रहते हैं। आने वाले वर्षों में पॉवेल की नीतियों का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा, वहीं ट्रंप जैसी राजनीतिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएँ इस दिशा को प्रभावित करने की कोशिश करती रहेंगी।


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