
यूरोपीय राजनीतिक समुदाय (European Political Community) के ताज़ा शिखर सम्मेलन में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज़ की मुलाकात ने यूरोपीय राजनीति में एक सकारात्मक मोड़ ला दिया है। यह भेंट केवल दो देशों के बीच संवाद नहीं थी, बल्कि यूरोप के सामूहिक भविष्य और वैश्विक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण का संकेत भी थी।
🔍 चर्चाओं का केंद्र
बैठक के दौरान कई अहम मुद्दों पर विमर्श हुआ:
- यूक्रेन व मध्य पूर्व: दोनों नेताओं ने यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व की अस्थिरता को लेकर गहन विचार साझा किए। उनका मत था कि यूरोप को शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए निर्णायक भूमिका निभानी चाहिए।
- यूरोपीय प्रतिस्पर्धा और उद्योग: तकनीकी नवाचार, हरित ऊर्जा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में साझेदारी को मज़बूत करने पर सहमति बनी। यह सहयोग न केवल यूरोप की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाएगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा।
- जलवायु परिवर्तन और आगामी परिषद बैठक: 23-24 अक्टूबर को होने वाली यूरोपीय परिषद की बैठक से पहले दोनों नेताओं ने जलवायु संकट से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
🤝 नई पहल: द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन
इस मुलाकात का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष रहा 23 जनवरी को प्रस्तावित इटली-जर्मनी द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन। इसका उद्देश्य राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाना है। यह सम्मेलन यूरोपीय संघ के भीतर साझेदारी और एकता का सशक्त संदेश देगा।
🇪🇺 कूटनीति का प्रतीक
बैठक के दौरान यूरोपीय संघ, इटली और जर्मनी—तीनों के झंडों की मौजूदगी ने स्पष्ट कर दिया कि यह केवल द्विपक्षीय संवाद नहीं था, बल्कि यूरोपीय एकता और सामूहिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व भी था। मेलोनी और शोल्ज़ की यह पहल आने वाले समय में यूरोप की स्थिरता, विकास और सहयोग की नई दिशा तय कर सकती है।
✨ निष्कर्ष
यह मुलाकात दिखाती है कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच यूरोप के प्रमुख देशों को सहयोग और साझेदारी की नई राह तलाशनी होगी। इटली और जर्मनी के बीच यह पहल न केवल द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाएगी, बल्कि पूरे महाद्वीप के लिए साझा रणनीति और भविष्य की राह भी प्रशस्त करेगी।