
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स की हालिया मुलाकात ने द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा का संचार किया है। यह संवाद केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं था, बल्कि यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक सशक्त संदेश साबित हुआ—कि वैश्विक शांति और पुनर्निर्माण की दिशा में हर राष्ट्र की भूमिका अहम है।
🔹 प्रमुख मुद्दों पर सहमति
1. पुनर्निर्माण और रक्षा सहयोग
यूक्रेन युद्ध के बाद पुनर्निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए साइप्रस ने परिवहन, ऊर्जा और संचार के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं का समर्थन करने की इच्छा जताई। साथ ही, रक्षा सहयोग को मजबूती देने के लिए साइप्रस ने सैन्य सहायता जारी रखने का भरोसा दिलाया।
2. यूरोपीय संघ में साइप्रस की जिम्मेदारी
साल 2026 की पहली छमाही में जब साइप्रस यूरोपीय संघ की परिषद की अध्यक्षता करेगा, तब राष्ट्रपति क्रिस्टोडुलाइड्स ने आश्वासन दिया कि उनका देश यूक्रेन के हितों को प्राथमिकता देगा और रूस–यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए यूरोपीय स्तर पर ठोस कदम उठाएगा।
3. वैश्विक शांति पहल में साझेदारी
दोनों नेताओं ने Coalition of the Willing के अंतर्गत सहयोग करने पर सहमति जताई। यह पहल यूक्रेन में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में कार्यरत है। साइप्रस की मानवीय सहायता और राजनीतिक समर्थन को राष्ट्रपति जेलेंस्की ने विशेष प्रशंसा के साथ रेखांकित किया।
🔹 राष्ट्रपति जेलेंस्की का आभार
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा करते हुए कहा कि साइप्रस ने न केवल सैन्य बल्कि मानवीय मोर्चे पर भी यूक्रेन का साथ दिया है। उन्होंने माना कि साइप्रस की सक्रिय भागीदारी यूक्रेन में स्थिरता और शांति की राह को और मजबूत करती है।
🔹 सारांश
यह मुलाकात केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि एक व्यापक वैश्विक दृष्टिकोण का प्रतीक थी। यूक्रेन और साइप्रस का सहयोग इस तथ्य को उजागर करता है कि छोटे राष्ट्र भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और शांति निर्माण में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। यूक्रेन की दृढ़ इच्छाशक्ति और साइप्रस का ठोस समर्थन मिलकर ऐसे भविष्य की नींव रख रहे हैं जहाँ संघर्ष की जगह साझेदारी और पुनर्निर्माण की गूंज सुनाई देगी।