
3 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” आज 11 वर्षों का मार्गदर्शक सफर पूरा कर चुका है। यह केबिलकुलवल एक रेडियो शो नहीं, बल्कि देशभर के लोगों से प्रत्यक्ष जुड़ाव का एक अनोखा माध्यम बन चुका है। इसने जनसंवाद की परंपरा को ही नए स्तर पर पहुँचाया है।
📊 कार्यक्रम का प्रभाव और पहुंच
- 100 करोड़ से अधिक श्रोता: देशभर में इसकी लोकप्रियता अभूतपूर्व रही है।
- 96% जागरूकता दर: हालिया सर्वेक्षण में लगभग हर नागरिक इस कार्यक्रम से परिचित पाया गया।
- ₹34.13 करोड़ का प्रसारण मूल्य: यह आंकड़ा दर्शाता है कि विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर कार्यक्रम की व्यापकता कितनी है।
🌐 बहु-भाषीय और बहु-आयामी प्रसारण
“मन की बात” अब 22 भारतीय भाषाओं और 12 विदेशी भाषाओं में उपलब्ध है। यह आकाशवाणी, दूरदर्शन, निजी एफएम चैनल, मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सुना जा सकता है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इसका समान रूप से स्वागत हुआ है।
💡 विषयवस्तु और सामाजिक प्रभाव
प्रधानमंत्री ने इस मंच का उपयोग केवल सरकारी योजनाओं के प्रचार के लिए नहीं किया, बल्कि समाज के अनसुने नायकों, नवाचारों और स्थानीय पहलों को उजागर किया। कोविड-19 महामारी के दौरान “मन की बात” ने लोगों को आशा, साहस और मानसिक समर्थन प्रदान किया।
मुख्य विषय जो समय-समय पर उठाए गए:
- स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली
- डिजिटल इंडिया और तकनीकी जागरूकता
- स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता को बढ़ावा
- शिक्षा और नवाचार के महत्व पर जोर
इन विषयों ने न केवल जनता को जागरूक किया, बल्कि सक्रिय भागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी उत्पन्न की।
👥 जनमानस के साथ संवाद
“मन की बात” का सबसे अनोखा पहलू यह है कि यह एकतरफा भाषण नहीं, बल्कि जनसंवाद है। इसमें आम नागरिकों की कहानियाँ, अनुभव और सुझाव शामिल होते हैं, जिससे यह कार्यक्रम हर भारतीय की आवाज बन गया।
🎉 11वीं वर्षगांठ: उपलब्धि और प्रेरणा
इस ऐतिहासिक मौके पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और डीडी न्यूज़ ने कार्यक्रम की उपलब्धियों को साझा किया और इसे जनसंवाद में क्रांतिकारी पहल बताया। सोशल मीडिया पर #MannKiBaat लगातार ट्रेंड कर रहा है और लाखों लोग इस यात्रा को सराह रहे हैं।