
🔸 भूमिका
विश्व राजनीति के इस दौर में जब पूंजी, प्रचार और शक्ति के केंद्रीकरण ने जनमत को प्रभावित करने का प्रयास तेज़ कर दिया है, वहीं एक नई चेतना आकार ले रही है — प्रतिरोध की वैश्विक लहर। यह लहर किसी एक देश, विचारधारा या भूभाग की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा पुकार बन चुकी है। “Voice of Iran” के नवीन अंक ने इसी भाव को रेखांकित किया है कि आज का संघर्ष केवल सीमाओं के पार नहीं, बल्कि विचारों और नैतिक मूल्यों के स्तर पर भी लड़ा जा रहा है।
✊ प्रतिरोध का अर्थ और उसके आयाम
प्रतिरोध का अर्थ केवल विद्रोह या टकराव नहीं है; यह अन्याय, शोषण और मानसिक उपनिवेशवाद के विरुद्ध एक वैचारिक पुनर्जागरण है। इसके कई रूप हैं—
- राजनीतिक प्रतिरोध: फिलिस्तीन, यमन, लेबनान और ईरान जैसे क्षेत्रों में जनता का आत्मनिर्णय के लिए संघर्ष।
- सांस्कृतिक प्रतिरोध: पश्चिमी प्रभाव के बीच अपनी भाषाओं, परंपराओं और स्थानीय संस्कृति की पुनः प्रतिष्ठा का प्रयास।
- डिजिटल प्रतिरोध: सेंसरशिप और प्रोपेगेंडा के बीच वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए सत्य और असहमति की आवाज़ को पहुँचाना।
यह प्रतिरोध बंदूक से नहीं, बल्कि विचारों, शब्दों और जागरूकता से लड़ा जा रहा है।
🌐 क्यों उठ रही हैं प्रतिरोध की ये लहरें?
आज की वैश्विक असमानताओं ने इस लहर को गति दी है।
- एकध्रुवीय व्यवस्था का विरोध: विश्व में अमेरिका-केंद्रित सत्ता संतुलन अब चुनौती के घेरे में है।
- साम्राज्यवादी नीतियों के विरुद्ध प्रतिक्रिया: अफ्रीका, एशिया और मध्य-पूर्व में जनता अब विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ खुलकर बोल रही है।
- आत्मनिर्णय का अधिकार: प्रत्येक राष्ट्र और समुदाय अपने विकास व भविष्य की दिशा स्वयं तय करना चाहता है।
यह लहरें केवल राजनीतिक विद्रोह नहीं, बल्कि वैश्विक चेतना का पुनर्जागरण हैं।
🇮🇷 ईरान की भूमिका: वैचारिक नेतृत्व का केंद्र
ईरान इस वैश्विक प्रतिरोध का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है।
- आध्यात्मिक मार्गदर्शन: ईरान का नेतृत्व प्रतिरोध को धार्मिक नैतिकता और मानवीय मूल्यों से जोड़ता है।
- विचार प्रसार के माध्यम: “Voice of Iran” जैसे मंच प्रतिरोध की आवाज़ को सीमाओं से परे पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं।
- रणनीतिक संतुलन: ईरान उन राष्ट्रों और समूहों को समर्थन देता है जो स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा के लिए संघर्षरत हैं।
इस प्रकार, ईरान केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैचारिक प्रेरणा का केंद्र बन गया है।
🔍 निष्कर्ष
“वैश्विक प्रतिरोध की लहरें” आज की दुनिया में आशा और आत्मसम्मान की नई कथा लिख रही हैं। जब सत्ता का दमन बढ़ता है, तो जनचेतना उसका उत्तर बनकर खड़ी होती है। यह प्रतिरोध केवल विरोध नहीं, बल्कि एक वैकल्पिक विश्व दृष्टि का प्रस्ताव है — जहाँ न्याय, स्वतंत्रता और सांस्कृतिक स्वाभिमान सर्वोपरि हों।