
विश्व में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी उपस्थिति ही प्रेरणा का स्रोत बन जाती है। इटली के सामी बासो (Sammy Basso) उन्हीं में से एक थे — एक ऐसा नाम जिसने “प्रोजेरिया” जैसी दुर्लभ बीमारी को पहचान दिलाई और मानवता को यह सिखाया कि जीवन की गुणवत्ता, उसकी लंबाई से नहीं, बल्कि उसकी गहराई से तय होती है।
🧬 असाधारण साहस का प्रतीक
प्रोजेरिया एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक रोग है, जिसमें शरीर तेजी से बुढ़ापा दिखाने लगता है। इस रोग से जूझते हुए भी सामी ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने न केवल अपने जीवन के लिए बल्कि दूसरों के लिए भी जीने का साहस दिखाया। कठिनाइयों के बावजूद उनकी मुस्कान, सकारात्मक दृष्टिकोण और समाज के प्रति योगदान ने उन्हें असंख्य लोगों का आदर्श बना दिया।
🌍 अनुसंधान और जागरूकता का मिशन
सामी बासो ने ‘Associazione Italiana Progeria Sammy Basso’ नामक संस्था की स्थापना की, जो इस दुर्लभ बीमारी पर शोध और जनजागरूकता के लिए समर्पित है। उनका प्रयास था कि दुनिया इस बीमारी को समझे, इसके इलाज पर काम करे, और जिन परिवारों के बच्चे इससे प्रभावित हैं, उन्हें सहारा मिले।
❤️ प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की श्रद्धांजलि
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उनके निधन की पहली बरसी पर जो शब्द लिखे, वे सामी के व्यक्तित्व की गहराई को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा —
“सामी बासो के असाधारण साहस, उनकी आस्था, उनकी शक्ति और अनुसंधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करते हुए, हम उनके जीवन को एक उज्ज्वल उदाहरण के रूप में मानते हैं, जिसे हम कभी नहीं भूलेंगे।”
यह संदेश केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि यह मानवीय मूल्यों का सम्मान है — उस अटूट जिजीविषा का, जो मृत्यु के भय को भी पराजित कर देती है।
🌟 जीवन से सीख
सामी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सीमाएँ शरीर में नहीं, विचारों में होती हैं। उन्होंने अपने छोटे से जीवन में वह कार्य कर दिखाया, जो अनेक लोग पूरे जीवन में भी नहीं कर पाते।
उनकी कहानी यह याद दिलाती है कि हर चुनौती के भीतर एक अवसर छिपा होता है — फर्क सिर्फ दृष्टिकोण का होता है।
🕊️ उपसंहार
सामी बासो आज हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी स्मृतियाँ और उनके कार्य समाज में सदा जीवित रहेंगे। उन्होंने यह साबित किया कि विज्ञान, साहस और आशा मिलकर असंभव को संभव बना सकते हैं।
उनकी मुस्कान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी — यह याद दिलाते हुए कि जीवन का असली अर्थ “पूर्णता” नहीं, “प्रेरणा” है।