
यहूदी धर्म का प्रमुख उत्सव सुखोत (Sukkot) हर वर्ष इज़राइल और विश्वभर में बसे यहूदी समुदायों द्वारा हर्ष और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का प्रतीक है, बल्कि यह सांस्कृतिक एकता, राष्ट्रीय पहचान और पारिवारिक मूल्यों का भी उत्सव है।
इस वर्ष इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस अवसर पर देशवासियों के लिए एक विशेष शुभकामना संदेश साझा किया, जिसने धार्मिक भावना के साथ-साथ राजनीतिक संकेत भी दिए।
🌿 सुखोत का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सार
सुखोत का इतिहास यहूदियों की मिस्र से मुक्ति और रेगिस्तान में चालीस वर्षों की यात्रा से जुड़ा है। इस पर्व में लोग अस्थायी झोपड़ियों या “सुखा” में निवास करते हैं, जो उस ऐतिहासिक कठिन यात्रा और ईश्वर में विश्वास का स्मरण कराती हैं।
पर्व के प्रमुख प्रतीकों — एत्रोग (citron) और लूलव (palm branch) — को पूजा और उत्सव का हिस्सा बनाया जाता है। ये प्रतीक प्रकृति, आस्था और एकता का प्रतिनिधित्व करते हैं, और जीवन की नश्वरता तथा आध्यात्मिक संतुलन की ओर संकेत करते हैं।
🕊️ नेतन्याहू का संदेश: परंपरा में निहित नेतृत्व
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने सोशल मीडिया संदेश में लिखा:
“हग सुखोत समेअह!
लमान अतीद ילדינו, נמשיך להוביל את מדינת ישראל בדרך הנכונה, מתוך אמונה בצדקת דרכנו.”
(हिंदी अनुवाद: “सुखोत की हार्दिक शुभकामनाएं!
अपने बच्चों के भविष्य के लिए, हम इज़राइल को सही दिशा में आगे बढ़ाते रहेंगे — अपने मार्ग की न्यायिकता में विश्वास रखते हुए।”)
यह संदेश केवल एक धार्मिक शुभकामना नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय दृष्टिकोण का भी परिचायक है। नेतन्याहू ने इस अवसर को भविष्य, परिवार और विश्वास के प्रतीकों से जोड़ा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनके लिए नेतृत्व का आधार सांस्कृतिक परंपरा और नैतिक प्रतिबद्धता है।
📖 तस्वीर के प्रतीक: ज्ञान, राष्ट्र और पहचान
अपने संदेश के साथ साझा की गई तस्वीर में नेतन्याहू पुस्तकालय के सामने खड़े दिखाई देते हैं, जहाँ पास में इज़राइल का झंडा भी मौजूद है। यह दृश्य अपने आप में कई स्तरों पर अर्थ प्रकट करता है:
- पुस्तकालय: ज्ञान, विचार और ऐतिहासिक चेतना का प्रतीक।
- राष्ट्रीय ध्वज: गर्व, संप्रभुता और सामूहिक एकता का द्योतक।
- धार्मिक प्रतीक: यह संकेत कि आधुनिक राजनीति भी अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ी रह सकती है।
इस संयोजन के माध्यम से नेतन्याहू ने यह दिखाने का प्रयास किया कि परंपरा और प्रगति को साथ लेकर चलना ही इज़राइल की स्थायी पहचान है।
🔍 विश्लेषण: धर्म और राज्य के बीच संतुलन
इज़राइल की राजनीति में धर्म और राज्य का संबंध सदैव एक संवेदनशील विषय रहा है। नेतन्याहू का यह संदेश एक रणनीतिक और प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखा जा सकता है:
- धार्मिक पर्व के माध्यम से यहूदी मतदाताओं से आत्मीय जुड़ाव।
- राजनीतिक नेतृत्व को आध्यात्मिक जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करना।
- “बच्चों के भविष्य” के संदर्भ में भावनात्मक और राष्ट्रीय संदेश देना।
यह रणनीति उस राजनीतिक धारणा को मज़बूत करती है कि धार्मिक एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा — दोनों इज़राइल की आत्मा के अविभाज्य हिस्से हैं।
✨ निष्कर्ष
सुखोत पर्व पर बेंजामिन नेतन्याहू का संदेश केवल एक पारंपरिक बधाई नहीं था, बल्कि यह आस्था, संस्कृति और नीति का संगम था। इस अवसर पर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इज़राइल की शक्ति न केवल उसकी सैन्य क्षमता में, बल्कि उसकी परंपराओं और विश्वास की निरंतरता में निहित है।
यह संदेश उस विचार को पुनर्स्थापित करता है कि —
आधुनिक राष्ट्र तभी मजबूत बनता है, जब वह अपनी जड़ों को पहचानता है और अपने भविष्य को विश्वास से दिशा देता है।