
7 अक्टूबर के दिन भारत की गायकी की एक अनुपम विभूति बेगम अख्तर को पूरे देश ने याद किया। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर उन्हें नमन करते हुए लिखा:
“ग़ज़ल और ठुमरी की महान कलाकार बेगम अख्तर को उनकी जयंती पर सादर नमन।
उनकी आत्मीय आवाज़ और भावनाओं की गहराई पीढ़ियों को प्रेरित करती रही है और आगे भी करती रहेगी।”
ममता बनर्जी का यह संदेश सिर्फ एक ट्वीट नहीं, बल्कि भारतीय संगीत परंपरा के प्रति उनके संवेदनशील दृष्टिकोण और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक था।
🎤 बेगम अख्तर: आत्मा को छू लेने वाली गायकी की मिसाल
अख्तरी बाई फैजाबादी, जिन्हें पूरी दुनिया बेगम अख्तर के नाम से जानती है, ने भारतीय शास्त्रीय संगीत में ग़ज़ल, ठुमरी और दादरा को एक नई पहचान दी।
उनकी आवाज़ में दर्द, विरह और मोहब्बत का ऐसा सम्मिश्रण था जो हर सुनने वाले को भीतर तक झकझोर देता था।
- उन्होंने उर्दू शायरी को संगीत की आत्मा बना दिया।
- उनकी प्रसिद्ध ग़ज़ल “ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया” आज भी सुनने वालों के दिलों को भिगो देती है।
- उनके योगदान के सम्मान में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से अलंकृत किया था।
बेगम अख्तर की गायकी सिर्फ सुरों का प्रवाह नहीं थी, बल्कि वह मानवीय संवेदनाओं की गाथा थी।
🌸 ममता बनर्जी और सांस्कृतिक चेतना
ममता बनर्जी का यह श्रद्धांजलि संदेश इस बात का उदाहरण है कि वे केवल एक राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील नागरिक भी हैं, जिनके भीतर कला और संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान है।
- वे इससे पहले रवींद्रनाथ टैगोर, लता मंगेशकर, और किशोर कुमार जैसे महान कलाकारों की जयंती पर भी सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि दे चुकी हैं।
- उनके संदेश यह दर्शाते हैं कि राजनीति से परे भी भारतीय संस्कृति की आत्मा के साथ उनका गहरा जुड़ाव है।
यह पहल न केवल बंगाल, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने की दिशा में सराहनीय है।
💬 जनता की प्रतिक्रिया
ममता बनर्जी का यह ट्वीट सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ। हजारों लोगों ने इसे साझा किया और अनेक संगीत प्रेमियों ने बेगम अख्तर की याद में भावपूर्ण टिप्पणियाँ कीं।
यह प्रतिक्रिया बताती है कि उनकी आवाज़ आज भी लोगों के दिलों में जीवित है और ममता बनर्जी का संदेश उस स्मृति को पुनर्जीवित करने का माध्यम बना।
🔚 निष्कर्ष
बेगम अख्तर केवल एक गायिका नहीं थीं, बल्कि भारतीय संगीत का एक अध्याय थीं — जो दर्द और सौंदर्य को सुरों में ढालने की कला जानती थीं।
उनकी जयंती पर ममता बनर्जी द्वारा किया गया यह स्मरण हमें यह अहसास कराता है कि जब नेता संस्कृति का सम्मान करते हैं, तो वे राष्ट्र की आत्मा को सशक्त बनाते हैं।
कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के भावनात्मक विकास की पहचान है — और बेगम अख्तर इस पहचान की सबसे मधुर प्रतीक थीं।