
भारत आज जिस गति से डिजिटल परिवर्तन की ओर अग्रसर है, उसने विकास और नवाचार के अनेक अवसर खोले हैं। लेकिन साथ ही, इस डिजिटल विस्तार ने “ट्रस्ट” यानी विश्वास और “सेफ्टी” यानी सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियाँ भी पैदा की हैं। इन्हीं विषयों पर केंद्रित रहा “Trust & Safety India Festival 2025”, जिसमें नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और वैश्विक संगठनों ने डिजिटल भविष्य की दिशा पर गंभीर विमर्श किया।
इस अवसर पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने विचार रखते हुए डिजिटल युग में जिम्मेदारी, पारदर्शिता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर विशेष बल दिया। उनका संबोधन इस बात का संकेत था कि भारत अब डिजिटल नीतियों का केवल अनुयायी नहीं, बल्कि एक दिशा देने वाला राष्ट्र बन चुका है।
🗣️ डॉ. जयशंकर के प्रमुख विचार
डॉ. जयशंकर ने अपने वक्तव्य में कहा कि:
“ट्रस्ट और सेफ्टी केवल तकनीकी शब्द नहीं हैं, बल्कि ये हमारे समाज, लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा से गहराई से जुड़े विषय हैं।”
उनके विचारों से कई महत्वपूर्ण आयाम स्पष्ट हुए:
- डिजिटल संप्रभुता पर बल: उन्होंने कहा कि भारत को अपनी डिजिटल नीतियों को इस तरह गढ़ना होगा कि वे आत्मनिर्भरता और संप्रभुता को सशक्त करें। इससे भारत न केवल अपने डेटा पर नियंत्रण रखेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्वतंत्र आवाज़ भी बुलंद करेगा।
- फेक न्यूज़ पर अंकुश: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि गलत सूचना और अफवाहें अब केवल सोशल मीडिया की समस्या नहीं रहीं, बल्कि ये राष्ट्रीय एकता और लोकतंत्र के लिए चुनौती बन चुकी हैं। सरकार इसके लिए बहुस्तरीय तंत्र और साझेदारी-आधारित समाधान विकसित कर रही है।
- साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण: उन्होंने बताया कि भारत में डेटा सुरक्षा कानूनों को और मज़बूत किया जा रहा है, ताकि नागरिकों को भरोसेमंद और पारदर्शी डिजिटल वातावरण मिल सके।
- वैश्विक सहयोग की आवश्यकता: मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि डिजिटल ट्रस्ट और सेफ्टी का सवाल केवल किसी एक देश का नहीं है — यह वैश्विक जिम्मेदारी है। भारत G20, BRICS और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
🌐 वैश्विक डिजिटल विमर्श में भारत की भूमिका
इस फेस्टिवल ने यह संदेश दिया कि भारत अब डिजिटल उपभोक्ता से डिजिटल नीति निर्माता की भूमिका में प्रवेश कर चुका है। डॉ. जयशंकर के विचारों ने यह स्पष्ट किया कि भारत केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा को ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर एक न्यायसंगत, सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल व्यवस्था की स्थापना के लिए भी प्रतिबद्ध है।
🔍 निष्कर्ष
डिजिटल ट्रस्ट और सेफ्टी आज सिर्फ तकनीकी कंपनियों या एल्गोरिद्म की चिंता नहीं रह गई है — यह सामाजिक स्थिरता, राजनीतिक पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का केंद्र बन चुकी है।
डॉ. एस. जयशंकर का संदेश इस बात की पुष्टि करता है कि भारत आने वाले वर्षों में न केवल डिजिटल शासन का उदाहरण बनेगा, बल्कि वैश्विक डिजिटल नैतिकता और सुरक्षा मानकों को आकार देने वाला देश भी होगा।