
विश्व अर्थव्यवस्था में सहयोग की नई परिभाषा लिखते हुए, यूरोपीय संघ (EU) और विश्व बैंक समूह ने एक व्यापक रणनीतिक गठबंधन की घोषणा की है। इस साझेदारी का लक्ष्य है — विश्वभर में निवेश, सुधार और सतत विकास को नई गति देना।
यह घोषणा 8 अक्टूबर 2025 को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा की गई, जिन्होंने इस पहल को “साझा समृद्धि और जलवायु न्याय की दिशा में ठोस कदम” बताया।
🤝 साझेदारी के प्रमुख उद्देश्य
यह सहयोग केवल वित्तीय समर्थन का नहीं, बल्कि एक समग्र विकास दृष्टिकोण का प्रतीक है। इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- विकासशील देशों में संरचनात्मक और आर्थिक सुधारों को तेज़ी से लागू करना।
- सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच प्रभावी साझेदारी स्थापित कर निवेश को आकर्षित करना।
- जलवायु परिवर्तन, हरित ऊर्जा, डिजिटल संपर्क, शिक्षा और सामाजिक कल्याण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में परियोजनाओं को क्रियान्वित करना।
इस पहल के अंतर्गत प्रथम चरण में चार महाद्वीपों में 18 परियोजनाएं शुरू की जाएंगी, जो आने वाले वर्षों में इस सहयोग का आधार बनेंगी।
🌐 वैश्विक स्तर पर परियोजनाओं का विस्तार
हालांकि इन परियोजनाओं की पूरी सूची अभी सार्वजनिक नहीं है, प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि ये पहलें अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और यूरोप के चुनिंदा देशों में कार्यान्वित होंगी।
संभावित परियोजनाओं के दायरे में शामिल हैं:
- हरित ऊर्जा ढांचे का निर्माण और नवीकरणीय स्रोतों को प्रोत्साहन।
- डिजिटल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार।
- शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार।
- कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना।
💼 निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी
इस साझेदारी का एक विशेष पहलू है “क्राउडिंग-इन” (Crowding-In) मॉडल — जिसके तहत निजी निवेशकों को जोखिम कम और अवसर अधिक प्रदान किए जाएंगे।
विश्व बैंक और यूरोपीय संघ ऐसे वित्तीय ढांचे तैयार कर रहे हैं, जो निजी पूंजी को आकर्षित करने के साथ स्थानीय उद्योग, रोजगार और तकनीकी हस्तांतरण को प्रोत्साहित करेंगे।
यह रणनीति न केवल विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त बनाएगी, बल्कि उन्हें वैश्विक मूल्य शृंखला (Global Value Chain) से भी जोड़ेगी।
🧭 भू-राजनीतिक और रणनीतिक महत्व
यह गठबंधन केवल आर्थिक पहल नहीं है — इसके गहरे भूराजनैतिक निहितार्थ हैं।
यूरोपीय संघ, वैश्विक दक्षिण में स्थायित्व, समावेशिता और जलवायु लचीलापन (Climate Resilience) को बढ़ावा देकर अपनी रणनीतिक उपस्थिति मज़बूत करना चाहता है।
वहीं, विश्व बैंक की तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय संसाधन इस दृष्टि को ज़मीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
दोनों संस्थाओं का यह तालमेल साझा विकास और उत्तरदायी वैश्वीकरण का एक नया मॉडल प्रस्तुत करता है।
🔍 निष्कर्ष
वर्तमान समय में जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु संकट और सामाजिक असमानताओं जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब EU–विश्व बैंक की यह साझेदारी एक आशा की किरण बनकर उभरी है।
यह पहल दर्शाती है कि यदि वैश्विक शक्तियाँ सहयोग की भावना से काम करें, तो सतत और न्यायसंगत विकास केवल एक सपना नहीं, बल्कि वास्तविकता बन सकता है।