
12 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि के अवसर पर एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसमें आगामी राजनीति की दिशा और ‘पीडीए’ की रणनीतिक धार भी साफ नज़र आई। सभा स्थल पर उमड़ी भारी भीड़ ने समाजवादी नेतृत्व को नई ऊर्जा दी और यह संदेश दिया कि सामाजिक न्याय की राजनीति आज भी लोगों के दिलों में गूंज रही है।
🗿 नेताजी की प्रतिमा के साथ जनभावना का प्रतीकात्मक प्रदर्शन
सभा के दौरान एक समर्थक द्वारा नेताजी की प्रतिमा को ऊंचा उठाकर ले जाने का दृश्य अत्यंत भावनात्मक रहा। यह केवल एक श्रद्धांजलि नहीं थी, बल्कि उस विचारधारा के प्रति निष्ठा का प्रदर्शन था जिसने भारत की स्वतंत्रता की नींव रखी थी। नेताजी की प्रतिमा के चारों ओर उमड़ी भीड़ ने यह स्पष्ट किया कि उनका आदर्श आज भी युवाओं और समाज के वंचित वर्गों को प्रेरित कर रहा है।
🔴 ‘पीडीए’ की दिशा और अखिलेश यादव का संदेश
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि यह जनसभा ‘पीडीए’—पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—वर्गों के गठबंधन की एकजुटता का प्रतीक है। उनके अनुसार यह केवल चुनावी समझौता नहीं, बल्कि समानता, सम्मान और अधिकारों की पुनर्स्थापना का सामाजिक अभियान है। उन्होंने नेताजी की विचारधारा को याद करते हुए कहा कि “सच्ची आज़ादी तभी संभव है जब हर वर्ग को समान अवसर मिले।”
यह संदेश साफ था कि समाजवादी पार्टी अपनी राजनीतिक यात्रा को अब सामाजिक परिवर्तन के व्यापक आंदोलन में बदलना चाहती है।
📢 जनसभा के मुख्य आकर्षण
- हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों की उपस्थिति ने सभा को एक जनलहर का रूप दिया।
- युवा और महिला वर्ग की उल्लेखनीय भागीदारी ने कार्यक्रम को ऊर्जा से भर दिया।
- समाजवादी झंडों, नारों और नेताजी की प्रतिमा के बीच वातावरण भावनात्मक और जोशपूर्ण रहा।
- अखिलेश यादव ने नेताजी के संघर्ष को वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य से जोड़ते हुए कहा कि “नेताजी का सपना अधूरा नहीं रहेगा, सामाजिक न्याय ही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।”
💬 सोशल मीडिया पर असर
अखिलेश यादव की इस सभा के वीडियो और ट्वीट्स ने सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया पाई। हजारों यूज़र्स ने इसे रीपोस्ट किया और “#PDA_ki_Hunkar” जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे “जनता से जुड़ी नई समाजवादी लहर” के रूप में व्याख्यायित किया।
🔍 निष्कर्ष
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि पर आयोजित यह जनसभा केवल स्मरण का अवसर नहीं थी, बल्कि भविष्य की राजनीति के संकेत भी अपने साथ लाई। अखिलेश यादव ने नेताजी की प्रेरणा को सामाजिक न्याय के एजेंडे से जोड़कर यह स्पष्ट किया कि इतिहास से प्रेरणा लेकर वर्तमान को बदला जा सकता है।
‘पीडीए’ की यह हुंकार बताती है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब समानता, सम्मान और प्रतिनिधित्व की नई लहर उठ चुकी है—और यही नेताजी के सपनों का सच्चा सम्मान भी है।