
12 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विभिन्न राज्यों से आए किसानों, मछुआरों और कृषि क्षेत्र में सक्रिय महिलाओं के साथ प्रत्यक्ष संवाद कर एक ऐतिहासिक पहल की। यह संवाद केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भर और नवोन्मेषी कृषि भारत के निर्माण की एक सशक्त परिकल्पना भी था।
🌾 किसानों की जमीनी हकीकत पर केंद्रित बातचीत
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने किसानों से उनकी वास्तविक चुनौतियों और सफल प्रयोगों के बारे में विस्तार से चर्चा की। कुछ किसानों ने ड्रोन तकनीक, जैविक खाद और सौर ऊर्जा के माध्यम से खेती को आधुनिक बनाने के अपने अनुभव साझा किए। वहीं मछुआरों ने समुद्री संसाधनों के संरक्षण और तकनीकी उपकरणों के उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के तरीकों पर प्रकाश डाला।
👩🌾 महिला शक्ति: कृषि विकास की नई पहचान
प्रधानमंत्री ने इस संवाद में ग्रामीण महिलाओं के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि, “जब महिला शक्ति खेतों से जुड़ती है, तो खेती केवल पेशा नहीं रह जाती — यह राष्ट्र निर्माण का माध्यम बन जाती है।” उन्होंने बताया कि सरकार महिला किसानों के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और तकनीकी सशक्तिकरण पर केंद्रित नई योजनाएँ शुरू कर रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका और मज़बूत हो सके।
🚜 डिजिटल और हरित कृषि की ओर भारत का कदम
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय कृषि अब पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ चुकी है। उन्होंने डिजिटल कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित फसल निगरानी, स्मार्ट सिंचाई और कृषि स्टार्टअप्स जैसे विषयों पर ज़ोर दिया। उनका कहना था कि अब समय है जब किसानों को न सिर्फ़ ‘उत्पादक’ बल्कि ‘उद्यमी’ के रूप में देखा जाए।
🌍 #ViksitBharat की दिशा में सशक्त पहल
यह संवाद कार्यक्रम ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न का हिस्सा था। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि कृषि क्षेत्र इस मिशन का आधार स्तंभ है। उनका संदेश स्पष्ट था — “जब किसान समृद्ध होगा, तभी भारत विकसित होगा।” यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक प्रेरक और निर्णायक कदम साबित हुआ।