
भारत में फिटनेस और स्वास्थ्य को लेकर नई चेतना जगाने वाला अभियान—“Sundays On Cycle”—धीरे-धीरे एक सामाजिक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। यह पहल न केवल शरीर को सक्रिय रखने का संदेश देती है, बल्कि नागरिकों में एकता, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण की भावना भी जगाती है।
🌱 पहल की प्रेरणा और उद्देश्य
इस प्रेरक अभियान की शुरुआत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने की। उन्होंने इसे “Health Army” के मिशन से जोड़ते हुए लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
इसका मूल उद्देश्य है—
- सप्ताहांत को फिटनेस और ताजगी के नाम समर्पित करना,
- सामूहिक रूप से साइक्लिंग को लोकप्रिय बनाना,
- और हर नागरिक में “सक्रिय भारत, स्वस्थ भारत” की भावना विकसित करना।
हर रविवार सड़कों पर उतरते ये साइक्लिस्ट न केवल अपनी सेहत सुधारते हैं, बल्कि देश को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने का संदेश भी देते हैं।
📸 आयोजन की झलकियां
12 अक्टूबर 2025 को आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न आयु वर्ग के लोग उत्साहपूर्वक शामिल हुए। हेलमेट और साइक्लिंग गियर से सजे प्रतिभागी मुस्कुराते हुए सड़क पर साथ-साथ चलते दिखे। अनुशासन, ऊर्जा और सकारात्मकता से भरपूर यह आयोजन एक सशक्त सामुदायिक भावना का उदाहरण बना।
🌍 पर्यावरण और समाज पर प्रभाव
“Sundays On Cycle” के परिणाम बहुआयामी हैं—
- साइक्लिंग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे पर्यावरण स्वच्छ रहता है।
- यह लोगों को सामाजिक जुड़ाव और मानसिक ताजगी का अवसर देता है।
- युवा वर्ग में फिटनेस और आत्म-नियंत्रण की भावना को मजबूत करता है।
- और सबसे बढ़कर, यह बताता है कि स्वास्थ्य सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है।
🇮🇳 एक स्वस्थ राष्ट्र की ओर
यह अभियान यह साबित करता है कि यदि सरकार और नागरिक एक साथ कदम बढ़ाएं, तो “जन-स्वास्थ्य” को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जा सकता है।
“Sundays On Cycle” एक साधारण आयोजन नहीं, बल्कि भारत के स्वस्थ और आत्मनिर्भर भविष्य की प्रतीक पहल है।
🩵 निष्कर्ष
साइक्लिंग की यह साप्ताहिक परंपरा अब एक आदत बनती जा रही है — ऐसी आदत जो शरीर को मजबूती, मन को शांति और समाज को एकता देती है।
“Sundays On Cycle” यह संदेश देता है कि सिर्फ एक दिन की साइक्लिंग भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।