
भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को मातृभाषाओं के माध्यम से अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है। इसी विचार को साकार करते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है — अब संस्थान में बीटेक पाठ्यक्रम की कक्षाएं हिंदी माध्यम में भी संचालित की जा रही हैं। यह पहल न केवल भाषा के स्तर पर समानता का प्रतीक है, बल्कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में समावेश और आत्मनिर्भरता की भावना को भी सशक्त करती है।
🎓 हिंदी माध्यम: समान शिक्षा, समान मानक
IIT जोधपुर ने यह सुनिश्चित किया है कि हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को वही पाठ्यक्रम, प्रयोगशालाएं और मूल्यांकन प्रक्रिया मिले जो अंग्रेज़ी माध्यम के छात्रों को प्राप्त होती है। इसका अर्थ यह है कि ज्ञान का मूल्य भाषा से नहीं, बल्कि समझ से तय होगा।
यह कदम विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए लाभदायक है जो अब तक अंग्रेज़ी की जटिलता के कारण तकनीकी शिक्षा से दूर रह जाते थे। अब वे अपनी मातृभाषा में तकनीकी अवधारणाओं को गहराई से समझ सकेंगे और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ पाएंगे।
🌐 भाषाई समावेशिता की ओर निर्णायक कदम
NEP 2020 इस विचार पर आधारित है कि शिक्षा तभी प्रभावी होती है जब वह विद्यार्थी की सोच और संस्कृति से जुड़ी हो। हिंदी माध्यम में बीटेक की शुरुआत से ग्रामीण, अर्ध-शहरी और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के विद्यार्थियों को भी अब IIT जैसी संस्थाओं तक पहुँचने का अवसर मिलेगा।
यह पहल #BharatiyaBhashaUtsav जैसे अभियानों को भी मजबूती प्रदान करती है, जो भारतीय भाषाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के क्षेत्र में प्रोत्साहन देने का कार्य कर रहे हैं।
🧠 मातृभाषा में अध्ययन से बढ़ेगी गहराई और आत्मविश्वास
शैक्षिक शोध लगातार यह सिद्ध करते हैं कि विद्यार्थी जब अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करते हैं, तो उनकी अवधारणात्मक समझ अधिक प्रबल होती है। हिंदी माध्यम में बीटेक की पढ़ाई से छात्र न केवल तकनीकी विषयों को आसानी से आत्मसात कर सकेंगे, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और नवाचार की भावना भी मजबूत होगी।
इससे यह भी संभव होगा कि वे भविष्य में वैश्विक स्तर पर अंग्रेज़ी माध्यम में सहजता से संवाद स्थापित कर सकें।
🔍 निष्कर्ष: शिक्षा में समानता और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
IIT जोधपुर की यह पहल केवल एक शैक्षणिक प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा नीति का जीवंत उदाहरण है। यह दिखाती है कि भाषा को बाधा नहीं, बल्कि सेतु के रूप में उपयोग किया जा सकता है। यदि अन्य तकनीकी संस्थान भी इस मॉडल को अपनाते हैं, तो भारत में तकनीकी शिक्षा का परिदृश्य अधिक समावेशी, स्वदेशी और सशक्त बन सकता है।
यह कदम वास्तव में भारत को “ज्ञान के आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में आगे बढ़ाने का सशक्त प्रतीक है।