
हर वर्ष 15 अक्टूबर को भारत उस महान आत्मा को नमन करता है जिसने न केवल विज्ञान की दिशा बदली, बल्कि करोड़ों युवाओं की सोच को भी नई उड़ान दी — डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम। वे केवल मिसाइल मैन या राष्ट्रपति नहीं थे, बल्कि एक ऐसे विचारक थे जिन्होंने पूरे राष्ट्र को यह विश्वास दिलाया कि सपने देखने वाले ही इतिहास बनाते हैं।
🌠 संघर्ष से स्वर्णिम सफलता तक
रामेश्वरम के एक साधारण परिवार में जन्मे कलाम जी का जीवन किसी प्रेरणादायक उपन्यास से कम नहीं था। बचपन में अख़बार बाँटने वाला वह बालक अपनी मेहनत और अटूट जिज्ञासा के बल पर ISRO और DRDO जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुँचा।
भारत के पहले उपग्रह प्रक्षेपण यान SLV-III की सफलता और अग्नि व पृथ्वी मिसाइल परियोजनाओं में उनकी भूमिका ने उन्हें “भारत का मिसाइल मैन” बना दिया।
🛰️ विज्ञान को समाज से जोड़ने वाला दृष्टिकोण
डॉ. कलाम का मानना था कि विज्ञान का उद्देश्य केवल प्रयोगशालाओं में सीमित रहना नहीं है, बल्कि उसका उपयोग मानवता के कल्याण के लिए होना चाहिए।
उन्होंने तकनीकी नवाचारों को ग्रामीण विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का बीड़ा उठाया। उनके लिए विज्ञान केवल खोज नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का साधन था।
🇮🇳 राष्ट्रपति पद पर एक जनप्रिय व्यक्तित्व
2002 से 2007 तक राष्ट्रपति रहते हुए कलाम जी ने इस पद की परिभाषा ही बदल दी। वे केवल ‘राष्ट्रपति’ नहीं, बल्कि ‘जनता के राष्ट्रपति’ बने।
विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और युवा सम्मेलनों में जाकर वे बच्चों से संवाद करते, उन्हें बड़े सपने देखने और उनके लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देते।
उनका “India 2020: A Vision for the New Millennium” केवल एक किताब नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय स्वप्न दस्तावेज़ था, जिसमें आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की परिकल्पना थी।
📚 विचारों की विरासत
उनकी रचनाएँ — Wings of Fire, Ignited Minds, Inspiring Thoughts — आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक का काम करती हैं।
उनका अमर संदेश हर दिल में गूँजता है:
“सपने वो नहीं जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।”
यह कथन उनके व्यक्तित्व का सार है — कर्म, समर्पण और असीम आकांक्षा का संगम।
🕊️ अंतिम क्षणों तक समर्पण का उदाहरण
27 जुलाई 2015, जब वे शिलॉन्ग में एक व्याख्यान दे रहे थे, तभी उन्होंने अंतिम सांस ली — जैसे जीवनभर की तरह अंत तक ज्ञान बाँटते हुए।
उनका जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि सच्चे नेता वे हैं जो शब्दों से नहीं, कर्मों से प्रेरित करते हैं। आज भी उनकी जयंती पर देशभर में ‘युवा दिवस’ के रूप में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जहाँ उनके विचारों को आगे बढ़ाया जाता है।
🪶 निष्कर्ष
डॉ. कलाम केवल एक महान वैज्ञानिक या राष्ट्रपति नहीं थे — वे एक युग थे, एक आंदोलन थे, एक विचारधारा थे।
उनका जीवन यह संदेश देता है कि सीमित परिस्थितियों में भी असीम संभावनाएँ छिपी होती हैं।
उनकी जयंती पर हम सबका यह कर्तव्य बनता है कि हम उनके स्वप्नों को आगे बढ़ाएँ — एक ऐसा भारत बनाएँ जो ज्ञान, नैतिकता और नवाचार से परिपूर्ण हो।