
दिल्ली-एनसीआर की बिगड़ती वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दीपावली के अवसर पर सीमित समयावधि में हरित पटाखों के उपयोग की अनुमति प्रदान की है। यह ऐतिहासिक फैसला मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की खंडपीठ ने 15 अक्टूबर 2022 को सुनाया। निर्णय के अनुसार, नागरिक 23 और 24 अक्टूबर को शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक पर्यावरण-अनुकूल पटाखे चला सकेंगे।
🌿 क्या हैं हरित पटाखे?
हरित पटाखे वैज्ञानिक रूप से इस प्रकार तैयार किए गए हैं कि वे सामान्य पटाखों की तुलना में कम धुआं और कम शोर उत्पन्न करते हैं। इनमें सल्फर, नाइट्रेट और एल्युमिनियम जैसे रासायनिक तत्वों की मात्रा काफी घटाई गई है, जिससे वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण रहता है। यह नवाचार CSIR (वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद) के सहयोग से विकसित किया गया है, ताकि त्योहार की भावना और पर्यावरण संरक्षण दोनों का समन्वय बना रहे।
⚖️ न्यायालय का रुख और दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि केवल वही पटाखे चलाए जा सकते हैं जो प्रमाणित एजेंसियों द्वारा अनुमोदित हों। न्यायालय ने दिल्ली पुलिस और जिला प्रशासन को यह भी आदेश दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए। अदालत का कहना है कि यह अनुमति उत्सव की भावना को बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों को जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित करने हेतु दी गई है।
🌆 दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता की चुनौती
हर वर्ष दीपावली के बाद दिल्ली और उसके आसपास का इलाका गंभीर वायु प्रदूषण से जूझता है। पराली जलाने, वाहन उत्सर्जन और पटाखों के धुएं का संयुक्त प्रभाव वायुमंडल को भारी रूप से प्रदूषित कर देता है। ऐसे में यह आदेश त्योहार की परंपरा और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन साधने का प्रयास माना जा रहा है।
🤝 जनसहभागिता ही सफलता की कुंजी
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय तभी सार्थक होगा जब लोग स्वयं आगे बढ़कर हरित पटाखों का चयन करें और प्रदूषण फैलाने वाले उत्पादों से दूरी बनाएँ। प्रशासन को भी चाहिए कि वह निगरानी, जांच और जनजागरूकता के माध्यम से इस निर्णय को जनआंदोलन का रूप दे।
✨ निष्कर्ष:
दीपावली रोशनी, आनंद और उत्साह का पर्व है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम यह संदेश देता है कि खुशियाँ मनाने और प्रकृति की रक्षा करने के बीच कोई टकराव नहीं — यदि समाज मिलकर जिम्मेदारी से आगे बढ़े।