
वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था में कई गहरे परिवर्तन देखने को मिले हैं। हरियाणा—जो देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में गिना जाता है—ने इस सुधार का लाभ प्रभावशाली ढंग से उठाया है। विशेष रूप से गुरुग्राम, मानेसर, फरीदाबाद और पानीपत जैसे क्षेत्रों ने उत्पादन, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में नई गति प्राप्त की है।
🏭 ऑटोमोबाइल उद्योग में नयी दिशा
गुरुग्राम और मानेसर को देश का “ऑटो हब” कहा जाता है। GST लागू होने के बाद ऑटो पार्ट्स पर कर दरों के एकीकरण ने इस क्षेत्र को बड़ी राहत दी। परिणामस्वरूप—
- उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आई
- आपूर्ति श्रृंखला अधिक संगठित और पारदर्शी बनी
- रोजगार सृजन के नए अवसर पैदा हुए
- निर्यात एवं प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों में वृद्धि दर्ज हुई
इससे हरियाणा का ऑटो सेक्टर न केवल देश में बल्कि वैश्विक बाजारों में भी मजबूत हुआ।
🧵 वस्त्र और हस्तशिल्प उद्योग को नई पहचान
GST के बाद वस्त्र उद्योग को भी बड़ा लाभ मिला। हरियाणा के पानीपत और भिवानी जैसे क्षेत्रों में कालीन, कपड़ा और घरेलू सजावटी उत्पादों के निर्माण में तेजी आई। प्रमुख लाभ इस प्रकार रहे—
- कच्चे माल की आपूर्ति सस्ती और सरल हुई
- राज्य सीमाओं के पार व्यापार में बाधाएँ घटीं
- पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का अवसर मिला
- निर्यात बाजारों में हरियाणा की हिस्सेदारी बढ़ी
🔧 इंजीनियरिंग और स्टील क्षेत्र का विस्तार
फरीदाबाद और यमुनानगर के इंजीनियरिंग तथा स्टील उद्योगों ने GST से बड़ी राहत पाई। टैक्स संरचना के सरलीकरण से छोटे और मध्यम उद्यम (MSMEs) को नई ऊर्जा मिली। परिणामस्वरूप—
- लागत नियंत्रण में मदद मिली
- औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि हुई
- स्थानीय उत्पादकों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिली
🌱 हरित ऊर्जा और सतत विकास को बल
GST ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रभाव डाला। सौर ऊर्जा उपकरणों और कृषि उर्वरकों पर कम कर दरों ने इस क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया। इससे—
- हरित परियोजनाओं की लागत में कमी आई
- सौर और पवन ऊर्जा को अपनाने की रफ्तार बढ़ी
- पर्यावरण संरक्षण लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान मिला
✨ निष्कर्ष
GST सुधारों ने हरियाणा की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उत्पादन, निर्यात, रोजगार और हरित निवेश के क्षेत्र में राज्य ने अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ने से हरियाणा आज उत्तर भारत के आर्थिक इंजन के रूप में उभर रहा है।