
विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “हर व्यक्ति तक खाद्य सुरक्षा पहुँचाना हमारी सरकार का प्राथमिक लक्ष्य है।” उन्होंने बताया कि 2011 से अब तक राज्य सरकार ने इस दिशा में अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, जिनसे करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
🌾 खाद्यसाथी योजना: 9 करोड़ लोगों तक निःशुल्क राशन
‘खाद्यसाथी’ (Khadya Sathi) योजना के तहत राज्य सरकार लगभग 9 करोड़ नागरिकों को निःशुल्क राशन उपलब्ध करा रही है। इस योजना का उद्देश्य है कि किसी भी नागरिक को भूख या आर्थिक तंगी के कारण भोजन से वंचित न रहना पड़े।
इनमें से करीब 7 करोड़ 50 लाख लोगों को “दुआरे राशन” (Duare Ration) पहल के माध्यम से उनके घरों तक राशन पहुँचाया जा रहा है। बाकी लाभार्थी अपनी सुविधा के अनुसार निकटतम राशन दुकानों से खाद्यान्न प्राप्त कर रहे हैं।
🌱 विशेष सहायता पैकेज
मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग 54 लाख लोग, जिनमें जंगलमहल क्षेत्र के निवासी, चक्रवात ‘आइला’ से प्रभावित परिवार, सिंगूर के किसान, टोटो जनजाति और चाय बागान मजदूर शामिल हैं — इन्हें एक विशेष पैकेज के अंतर्गत रियायती दरों पर खाद्यान्न दिया जा रहा है।
🎉 त्योहारों में अतिरिक्त राहत
दुर्गा पूजा, काली पूजा, छठ पूजा और रमज़ान जैसे विशेष अवसरों पर गरीब परिवारों को सरकार अतिरिक्त सहायता प्रदान करती है। रमज़ान के महीने में जरूरतमंद परिवारों को चीनी, आटा और चने जैसी आवश्यक वस्तुएँ सब्सिडी दरों पर दी जाती हैं, जिससे वे त्योहार को गरिमा और संतुलन के साथ मना सकें।
🍛 ‘माँ’ परियोजना: सिर्फ 5 रुपये में गरम भोजन
गरीबों के लिए शुरू की गई ‘माँ’ (Maa) परियोजना आज पश्चिम बंगाल की सामाजिक कल्याण योजनाओं का प्रतीक बन चुकी है। इस योजना के तहत सिर्फ 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
राज्यभर में स्थापित 356 ‘माँ कैंटीनों’ के माध्यम से अब तक 8 करोड़ 58 लाख से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल चुका है।
🌾 किसानों के लिए नया कीर्तिमान
खाद्यसाथी परियोजना को सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने इस वर्ष 56 लाख 33 हजार मीट्रिक टन धान सीधे किसानों से खरीदा है। यह रिकॉर्ड स्तर की खरीद है, जिससे 16 लाख 50 हजार किसान परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिला है।
🌍 आत्मनिर्भर बंगाल की दिशा में कदम
ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल मुफ्त राशन देना नहीं, बल्कि ऐसा टिकाऊ खाद्य ढाँचा बनाना है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करे, किसानों की आय बढ़ाए और हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करे।
निष्कर्ष:
विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार का यह संदेश केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि एक प्रतिबद्धता है — कि किसी भी नागरिक को भूख या गरीबी के कारण अपना आत्मसम्मान न खोना पड़े। ‘खाद्यसाथी’ और ‘माँ’ जैसी योजनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि जब नीति और मानवीय संवेदना एक साथ आती हैं, तो एक राज्य भूख-मुक्त समाज की ओर वास्तविक कदम बढ़ा सकता है।