
भारत में त्योहार केवल तारीख़ों का सिलसिला नहीं, बल्कि भावनाओं का संगम हैं — ऐसे पल, जब समाज एक परिवार की तरह महसूस करता है। दीपावली की रोशनी, ईद की मिठास, क्रिसमस की घंटियाँ या होली के रंग — हर त्योहार एक साझा संदेश देता है: “हम भले अलग हों, पर दिल एक हैं।”
🤝 त्योहारों में समरसता की गूंज
त्योहार किसी एक वर्ग या समुदाय का नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का उत्सव होते हैं। गाँव की गलियों से लेकर शहर की सड़कों तक, हर जगह एक समान ऊर्जा महसूस होती है —
- कोई अपने हाथों से घर सजाता है,
- कोई मंदिर या मस्जिद में सेवा करता है,
- कोई मिठाइयाँ बाँटता है,
- तो कोई केवल एक मुस्कान के साथ अपनेपन की डोर मज़बूत करता है।
यह साझा भागीदारी ही समरसता का मूल है — जहाँ भेदभाव की दीवारें गिर जाती हैं और इंसानियत का पुल बनता है।
🌞 सकारात्मकता: हर त्योहार की आत्मा
त्योहार हमें सिखाते हैं कि सच्ची खुशी बाहरी चमक में नहीं, बल्कि दिल की रोशनी में है। जब हम किसी की मदद करते हैं, जब माफ़ करते हैं, या जब बिना किसी अपेक्षा के खुशियाँ बाँटते हैं — तब भीतर की नकारात्मकता खुद मिट जाती है।
त्योहारों की सकारात्मकता हमारे जीवन को इन तरीकों से छूती है —
- यह मन में आभार का भाव जगाती है,
- रिश्तों में स्नेह और विश्वास बढ़ाती है,
- समाज में शांति और सहयोग की भावना प्रबल करती है,
- और व्यक्ति को नई प्रेरणा से भर देती है।
🌈 निष्कर्ष: त्योहार, एक बेहतर समाज की राह
यदि हम त्योहारों को केवल परंपरा नहीं, बल्कि मानवता का उत्सव मानकर मनाएँ, तो समाज में वैमनस्य की जगह सौहार्द और स्वार्थ की जगह सहयोग स्वतः आ जाएगा।
त्योहारों का अर्थ तभी सार्थक है जब वे दिलों को जोड़ें, न कि बाँटें। क्योंकि असली उत्सव वही है, जहाँ सबकी मुस्कान एक साथ खिल उठे — बिना भेदभाव, बिना शर्त, और बिना दिखावे के।
🕊️ संक्षेप में:
त्योहार हमें यह याद दिलाते हैं कि जीवन की सबसे बड़ी पूजा “मानवता” है, और सबसे सच्चा दीपक वह है जो किसी और के जीवन में रोशनी भर दे।