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🌿 आदि कर्मयोगी अभियान: जनजातीय नेतृत्व और उत्तरदायी शासन का नवयुग


भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित “आदि कर्मयोगी अभियान” के अंतर्गत 17 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर की शोभा बढ़ाई देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने, जिनकी उपस्थिति ने पूरे आयोजन को एक नई दिशा और गरिमा प्रदान की।

🎯 अभियान का मूल दृष्टिकोण

“आदि कर्मयोगी अभियान” का उद्देश्य जनजातीय समुदायों में उत्तरदायी शासन की भावना को प्रोत्साहित करना और उनके बीच स्थानीय नेतृत्व के विकास को बढ़ावा देना है। यह पहल उन कर्मयोगियों को सम्मानित करने का एक माध्यम है, जिन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में अपने समुदायों में परिवर्तन की अलख जगाई है।

🏛️ राष्ट्रपति का प्रेरक संदेश

अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा —

“जनजातीय समाज हमारे राष्ट्र की आत्मा है। उनकी संस्कृति हमें यह सिखाती है कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही स्थायी विकास संभव है।”

उन्होंने जनजातीय युवाओं से आग्रह किया कि वे शासन व्यवस्था में सक्रिय रूप से भाग लें, आत्मनिर्भर बनें और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाकर अपने समुदायों को सशक्त करें।

🌟 सम्मेलन की प्रमुख विशेषताएँ

🌱 सामुदायिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम

यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि सशक्तिकरण की वास्तविक प्रक्रिया का प्रतीक है। इसने यह स्पष्ट किया कि शासन व्यवस्था तभी प्रभावी होती है, जब उसमें स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी हो।
“आदि कर्मयोगी अभियान” इसी विचार का मूर्त रूप है — कि परिवर्तन ऊपर से नहीं, बल्कि समाज के मूल से शुरू होता है।


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