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🇺🇸 अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक टैक्स प्रस्ताव को ठुकराया: नीति निर्णय या राजनीतिक संदेश?


अक्टूबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावित वैश्विक टैक्स को रोकने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई बहस छेड़ दी है। अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने इस कदम की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह “अमेरिकी करदाताओं के लिए एक बड़ी जीत” है और अमेरिका ने “वैश्विक जलवायु परियोजनाओं के नाम पर नए कर बोझ” को नकार दिया है।

🌍 संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव क्या था?

संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष समिति ने सुझाव दिया था कि सदस्य राष्ट्रों से एक वैश्विक उपभोक्ता कर (Global Consumer Tax) वसूला जाए। इस कर से प्राप्त धनराशि का उद्देश्य था:

लेकिन, अमेरिका ने इस योजना को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यह कदम अमेरिकी नागरिकों और उपभोक्ताओं पर “अनावश्यक आर्थिक दबाव” डालेगा।

🇺🇸 राष्ट्रपति की रणनीति और संदेश

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि अमेरिका किसी भी प्रकार के अंतरराष्ट्रीय कराधान (Global Taxation) का समर्थन नहीं करेगा। यह निर्णय उनके “America First” एजेंडे की झलक है, जो वैश्विक दायित्वों से पहले राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है।

कूटनीतिक स्तर पर यह कदम यह भी दर्शाता है कि अमेरिका वैश्विक संगठनों की कर नीति पर अपनी स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है।

🔍 राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस कदम के कई रणनीतिक और घरेलू निहितार्थ हैं:

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह निर्णय वैश्विक जलवायु वित्तपोषण को कमजोर कर सकता है और अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय सहयोग से अलग-थलग कर सकता है।

🌐 विश्व समुदाय की प्रतिक्रिया

📌 निष्कर्ष

अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक टैक्स प्रस्ताव को रोकना केवल आर्थिक कदम नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी है। इससे जहां अमेरिका अपनी आर्थिक स्वतंत्रता पर जोर देता है, वहीं यह सवाल भी उठता है कि क्या यह नीति वैश्विक जलवायु प्रयासों को आगे बढ़ाएगी या फिर सहयोग की राह में नई दीवार खड़ी करेगी।


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