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🌿 भगवान धन्वंतरि जयंती: आयुर्वेद और स्वास्थ्य का दिव्य पर्व


भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा में कई ऐसे पर्व शामिल हैं जो धार्मिक आस्था के साथ-साथ जीवन के स्वास्थ्य और संतुलन की शिक्षा भी देते हैं। इन्हीं में से एक है भगवान धन्वंतरि जयंती। यह पर्व आयुर्वेद के संस्थापक, स्वास्थ्य के संरक्षक और अमृत के वाहक भगवान धन्वंतरि को समर्पित है।

🕉️ भगवान धन्वंतरि का परिचय

पुराणों के अनुसार, भगवान धन्वंतरि देवताओं के वैद्य के रूप में प्रसिद्ध हैं। समुद्र मंथन के समय उन्होंने अमृत कलश लेकर प्रकट होकर सभी देवताओं को अमृत प्रदान किया। उनके हाथों में शंख, औषधियाँ, जड़ी-बूटियाँ और अमृत का कलश होता है, जो स्वास्थ्य, दीर्घायु और जीवन शक्ति का प्रतीक हैं।

📜 आयुर्वेद की उत्पत्ति

धन्वंतरि को आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने मानव जाति को रोगों से मुक्ति दिलाने और जीवन को संतुलित बनाने के लिए आयुर्वेद का ज्ञान दिया। यह चिकित्सा पद्धति केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर नहीं, बल्कि मन और आत्मा के संतुलन पर भी आधारित है। आयुर्वेद का मूल उद्देश्य है —
“स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं”

🎉 धन्वंतरि जयंती का महत्व

धनतेरस के दिन, जो दीपावली से दो दिन पहले पड़ता है, भगवान धन्वंतरि की जयंती मनाई जाती है। इस दिन आयुर्वेद चिकित्सक, वैद्य और स्वास्थ्य से जुड़े लोग उनके पूजन और औषधियों की विधि-अनुसार पूजा करते हैं। कई राज्यों में आयुर्वेदिक मेलों, स्वास्थ्य शिविरों और जागरूकता अभियानों का आयोजन भी किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को संदेश देते हुए कहा —
“भगवान धन्वंतरि की जयंती पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। उनकी कृपा से सभी को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि प्राप्त हो।”

🌱 आधुनिक समय में आयुर्वेद का योगदान

आज जब दुनिया प्राकृतिक चिकित्सा और जीवनशैली सुधार की ओर बढ़ रही है, आयुर्वेद का महत्व और बढ़ गया है। योग, पंचकर्म, औषधीय जड़ी-बूटियाँ और संतुलित जीवनशैली के माध्यम से आयुर्वेद न केवल रोगों का उपचार करता है, बल्कि उन्हें रोकने और जीवन को बेहतर बनाने की शक्ति भी प्रदान करता है।

🙏 निष्कर्ष

धन्वंतरि जयंती सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, संतुलन और जीवन की गुणवत्ता को समर्पित एक संदेश है। यह दिन हमें स्मरण कराता है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य और आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर हम न केवल रोगमुक्त रह सकते हैं, बल्कि मानसिक और आत्मिक शांति भी प्राप्त कर सकते हैं।


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