
भारत सरकार द्वारा 18 अक्टूबर 2016 को लॉन्च की गई राष्ट्रीय एससी-एसटी हब (National SC-ST Hub) योजना आज नौ साल पूरे कर चुकी है। यह पहल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के उद्यमियों को न केवल सशक्त बनाने का माध्यम बनी है, बल्कि सरकारी खरीद प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है।
🌱 योजना का मुख्य उद्देश्य
राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना का केंद्र बिंदु है:
- एससी/एसटी उद्यमियों को सरकारी खरीद प्रणाली में सक्षम बनाना।
- प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, वित्तीय मार्गदर्शन और विपणन सहयोग प्रदान करना।
- सरकारी खरीद नीति के तहत माइक्रो और लघु उद्यमों (MSEs) से 4% खरीद सुनिश्चित करना।
📊 नौ वर्षों में प्रमुख उपलब्धियाँ
योजना की शुरूआत से अब तक कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं:
- हजारों एससी-एसटी उद्यमियों को मार्गदर्शन, ट्रेनिंग और तकनीकी सहयोग मिला।
- सरकारी खरीद लक्ष्य 4% से कई बार अधिक हासिल किया गया।
- पूरे देश में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाएँ, जागरूकता अभियान और प्रदर्शनी आयोजित की गई।
🛠️ सहयोगी संस्थाएँ और भागीदारी
इस योजना की सफलता में विभिन्न मंत्रालयों और संस्थाओं का योगदान रहा है:
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (@minmsme)
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (@MIB_India)
- नीति आयोग, डीडी न्यूज़, आकाशवाणी सहित अन्य मीडिया संस्थान।
साथ ही कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इस योजना के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई, जिनमें @AshwiniVaishnaw, @DrLMurugan, @jtanrammanjhi और @ShohaBJP शामिल हैं।
📽️ डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया का योगदान
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से योजना की पहुँच बढ़ाई। ट्विटर पर @MIB_India द्वारा साझा किए गए वीडियो में योजना की स्थापना तिथि 18 अक्टूबर 2016 दिखाई गई, जो इस पहल की निरंतरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
हैशटैग्स जैसे #NSSH, #MSE, #SCSTHub ने डिजिटल दुनिया में योजना को पहचान दी और युवाओं को इसके साथ जोड़ने में मदद की।
🔍 आगे की दिशा
हालाँकि योजना ने कई मील के पत्थर पार किए हैं, फिर भी कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं:
- ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को और अधिक बढ़ावा देना।
- वित्तीय संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना।
- महिला उद्यमियों के लिए विशेष प्रोत्साहन सुनिश्चित करना।
🏁 निष्कर्ष
राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना ने न केवल सामाजिक और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा दिया है, बल्कि सामाजिक न्याय की भावना को भी सशक्त किया है। नौ वर्षों की यह यात्रा यह दर्शाती है कि जब नीति, प्रतिबद्धता और सहयोग एक साथ आते हैं, तो वास्तविक परिवर्तन संभव है।