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चित्रकूट पेंशन घोटाला: ₹120 करोड़ के गबन से हड़कंप, SIT की जांच में नए खुलासे — 18 अक्टूबर 2025 की बड़ी खबर

चित्रकूट (उत्तर प्रदेश), 18 अक्टूबर 2025:
चित्रकूट जिले के कोषागार विभाग में हुए ₹120 करोड़ के पेंशन घोटाले ने पूरे प्रदेश के प्रशासन को हिला दिया है। शुक्रवार को सामने आई नई जानकारी के अनुसार, घोटाले में शामिल कई सेवानिवृत्त शिक्षकों और कोषागार कर्मियों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस घोटाले में एरियर (बकाया) भुगतान के नाम पर लाखों रुपये फर्जी खातों में ट्रांसफर किए गए थे।


🔹 सात साल से चल रहा था घोटाला

जांच में खुलासा हुआ है कि यह घोटाला साल 2018 से लगातार चल रहा था। घोटालेबाजों ने सेवानिवृत्त शिक्षकों और अन्य पेंशनभोगियों के नाम पर एरियर भुगतान के रूप में फर्जी पेंशन डालकर रकम अपने कब्जे में कर ली।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग ₹43.13 करोड़ की राशि केवल एरियर के माध्यम से गबन की गई थी।


🔹 SIT की जांच में तीन मुख्य नाम

कोषागार विभाग के भीतर से ही इस घोटाले को अंजाम देने वालों की पहचान हो चुकी है।
मुख्य आरोपियों में शामिल हैं —

  1. संदीप श्रीवास्तव, सहायक लेखाकार
  2. अशोक कुमार, लेखाकार
  3. अवधेश कुमार, सेवानिवृत्त सहायक लेखाकार (जो सेवानिवृत्ति के बाद भी संविदा पर कार्यरत था)

इन तीनों पर फर्जी एंट्री डालकर भुगतान स्वीकृत करने और दलालों के माध्यम से धन निकासी का आरोप है।


🔹 99 लोगों पर एफआईआर दर्ज

वरिष्ठ कोषाधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में कुल 99 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिनमें 4 सरकारी कर्मचारी और 93 पेंशनभोगी शामिल हैं।
जांच के दौरान पुलिस ने 95 संदिग्ध बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। माना जा रहा है कि इन खातों के जरिए गबन की गई राशि विभिन्न माध्यमों से आगे भेजी गई थी।


🔹 SIT की जांच जारी, गिरफ्तारी की तैयारी

पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि इस घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित की गई है, जिसकी कमान सर्कल अधिकारी (CO City) के हाथों में है।
उन्होंने कहा, “सभी संदिग्धों से पूछताछ जारी है। जिनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिल रहे हैं, उनके खिलाफ गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गबन की पूरी राशि की वसूली की जाएगी।”


🔹 अब तक ₹22 लाख बरामद

अब तक जांच एजेंसियों को केवल ₹22 लाख की राशि ही वापस मिल पाई है। हालांकि SIT को उम्मीद है कि बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए बाकी रकम का भी पता लगाया जाएगा।
वित्त विभाग ने भी सभी संविदा कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा शुरू कर दी है ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके।


🔹 प्रशासन ने बढ़ाई सख्ती

मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिला प्रशासन ने सभी पेंशन भुगतान प्रक्रियाओं की पुन: समीक्षा के आदेश दिए हैं। अब हर पेंशन ट्रांजेक्शन को डबल वेरिफिकेशन सिस्टम से गुजरना होगा।
इसके साथ ही, कोषागार में कार्यरत कर्मचारियों की डिजिटल निगरानी और लॉग रिकॉर्डिंग प्रणाली लागू की जा रही है ताकि डेटा में छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो सके।


🔹 जनता में नाराज़गी

चित्रकूट में इस घोटाले को लेकर आम जनता और सेवानिवृत्त शिक्षकों में गहरा रोष है। पेंशनभोगियों का कहना है कि यह उनकी मेहनत की कमाई पर डाका है, और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।


🔹 निष्कर्ष

चित्रकूट कोषागार पेंशन घोटाला अब उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक बन चुका है।
₹120 करोड़ की यह धोखाधड़ी न केवल सरकारी सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भ्रष्टाचार किस तरह आम नागरिकों की योजनाओं को प्रभावित कर रहा है।
SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आखिर यह जाल कितना गहरा था और इसमें कितने “बड़े नाम” शामिल हैं।



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