
उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर चलाया जा रहा “मिशन शक्ति 5.0” अब सिर्फ एक सरकारी पहल नहीं रहा, बल्कि यह महिलाओं के अधिकारों की रक्षा का एक सशक्त आंदोलन बन चुका है। मिर्जापुर पुलिस और अभियोजन विभाग की संयुक्त मेहनत से दहेज मृत्यु के एक मामले में चार दोषियों को दस वर्ष का कठोर कारावास और ₹5,000 का अर्थदंड सुनाया गया। यह फैसला बताता है कि जब साक्ष्य और इच्छाशक्ति साथ हों, तो न्याय अवश्य मिलता है।
⚖️ ऑपरेशन कन्विक्शन: न्याय की नई दिशा
1 मई 2017 को एक पीड़िता ने थाना कोतवाली शहर में दहेज उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लम्बी कानूनी प्रक्रिया, गवाहों के बयान और ठोस साक्ष्यों के आधार पर 2025 में न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराया। यह फैसला केवल एक परिवार के लिए राहत नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सशक्त संदेश है — कि दहेज की मांग अब “परंपरा” नहीं, बल्कि अपराध मानी जाएगी।
👮♀️ मिशन शक्ति की प्रमुख उपलब्धियां
- साक्ष्य-आधारित जांच: पुलिस और अभियोजन विभाग के समन्वय ने न्याय प्रक्रिया को मजबूत बनाया।
- तेज़ न्याय प्रणाली: मिशन शक्ति के अंतर्गत मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा रहा है।
- सार्वजनिक सहभागिता: सोशल मीडिया पर #MissionShakti5 और #OperationConvictionUPP जैसे अभियानों के ज़रिए जनता को जागरूक किया जा रहा है।
🔍 सामाजिक महत्व
यह फैसला केवल चार अपराधियों की सजा नहीं, बल्कि उस मानसिकता पर प्रहार है जो विवाह को दहेज से जोड़ती है। मिशन शक्ति का मूल संदेश है कि महिलाओं की गरिमा से समझौता करने वालों को अब कानून नहीं बख्शेगा। यह अभियान हर नागरिक को यह सोचने पर विवश करता है कि सामाजिक परिवर्तन केवल नारे से नहीं, बल्कि न्याय की कार्यवाही से आता है।
📢 निष्कर्ष
मिर्जापुर में मिली यह सफलता साबित करती है कि “मिशन शक्ति 5.0” महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक निर्णायक अध्याय लिख रहा है। जब पुलिस, अभियोजन और न्यायपालिका समान उद्देश्य से कार्य करें, तो अपराधी बच नहीं सकते और पीड़ित को न्याय अवश्य मिलता है। ऐसे अभियान न केवल अपराध के विरुद्ध लड़ाई हैं, बल्कि भयमुक्त और समानता-आधारित समाज की दिशा में ठोस कदम हैं।