
अक्टूबर 2025
इटली की राजनीति इस समय एक तीव्र वैचारिक मुठभेड़ के दौर से गुजर रही है। विपक्ष की प्रमुख नेता एल्ली श्लाइन और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच चल रही जुबानी जंग ने न केवल देश के भीतर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, बल्कि यूरोपीय राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है।
🔥 विवाद की शुरुआत कहाँ से हुई
एम्स्टर्डम में आयोजित पार्टी ऑफ यूरोपियन सोशलिस्ट्स (PSE) की कांग्रेस में एल्ली श्लाइन ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने इटली की सियासत को झकझोर दिया। उन्होंने कहा कि:
“इटली में लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में है। प्रधानमंत्री मेलोनी ने फ्लोरेंस में विपक्ष को ‘बुराई’ कहा, और पत्रकार रानुच्ची के घर के बाहर बम मिलने की घटना इस संकट का प्रतीक है।”
उनके इस वक्तव्य ने सत्तारूढ़ दल ब्रदर्स ऑफ इटली और स्वयं प्रधानमंत्री मेलोनी को गहरी प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर दिया।
🗣️ जॉर्जिया मेलोनी का पलटवार
प्रधानमंत्री मेलोनी ने एल्ली श्लाइन के आरोपों को “तथ्यहीन और अपमानजनक” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा:
“एल्ली श्लाइन को एक इटालियन नेता के रूप में अपने देश की गरिमा की रक्षा करनी चाहिए, न कि विदेश में उसकी छवि को धूमिल करना चाहिए। उनके बयान पूरी तरह से झूठ और भ्रम फैलाने वाले हैं।”
मेलोनी ने अपने ट्वीट में लिखा — “SIAMO AL DELIRIO” — यानी “हम उन्माद की स्थिति में हैं”, जो यह दिखाता है कि वह इस आरोप को कितनी गंभीरता से ले रही हैं।
📰 पत्रकार रानुच्ची की घटना
जिस घटना का जिक्र श्लाइन ने किया, वह पत्रकार सिगफ्रेडो रानुच्ची के घर के बाहर बम मिलने से जुड़ी है। इस घटना ने इटली के मीडिया जगत में हलचल मचा दी थी। हालांकि जांच एजेंसियों को अभी तक किसी राजनीतिक संलिप्तता का ठोस प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन विपक्ष इस प्रकरण को प्रेस की आज़ादी पर हमले के तौर पर प्रस्तुत कर रहा है।
⚖️ दो विचारधाराओं की जंग
यह विवाद वास्तव में इटली में दो भिन्न वैचारिक धाराओं का टकराव है:
- एल्ली श्लाइन लोकतंत्र, मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हिमायती हैं।
- जॉर्जिया मेलोनी राष्ट्रवादी राजनीति, पारंपरिक मूल्यों और सीमाओं की सुरक्षा पर जोर देती हैं।
दोनों नेताओं के बीच यह बहस केवल राजनीतिक मतभेद नहीं, बल्कि इटली की वैचारिक दिशा तय करने वाली बहस बन चुकी है।
🌍 यूरोपीय प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय गूंज
एम्स्टर्डम में दिए गए इस बयान के बाद यूरोपीय संघ के कई देशों में भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएँ आने लगी हैं। यूरोपीय मंच पर लोकतंत्र और प्रेस स्वतंत्रता को अत्यंत संवेदनशील विषय माना जाता है। ऐसे में इटली के विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप प्रधानमंत्री मेलोनी की सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा सकते हैं।
🔍 निष्कर्ष
इटली में यह विवाद स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आधुनिक राजनीति में शब्दों का प्रभाव सीमाओं से परे जा चुका है। एक बयान अब केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक विमर्श का हिस्सा बन जाता है।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बहस लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में जाएगी — या फिर राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा करेगी।